RISC और CISC Architecture क्या है?

RISC Architecture? (RISC क्या है?)

RISC का मतलब है एक ऐसा Computer जो बहुत ही कम और सरल निर्देशों (instructions) पर काम करता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे किसी छोटे बच्चे को काम समझाना हो, तो हम उसे लंबे और कठिन काम के बजाय छोटे-छोटे और आसान निर्देश देते हैं, ताकि वह उन्हें जल्दी और बिना गलती के पूरा कर सके। इसी तरह, RISC डिज़ाइन में प्रोसेसर को बहुत सीमित और आसान काम करने के लिए बनाया जाता है, जिससे वह बहुत तेजी से (speed) काम कर पाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यही होता है, कि प्रोसेसर हर निर्देश को एक ही बार में (single clock cycle) पूरा कर ले, जिससे कंप्यूटर की कुल काम करने की क्षमता बढ़ जाती है। चूँकि इसमें निर्देश सरल होते हैं, इसलिए उन्हें समझने और प्रोसेस करने में प्रोसेसर को कम समय लगता है, और यह बिजली की खपत (power consumption) भी कम करता है, इसीलिए इसका उपयोग आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन और आधुनिक लैपटॉप में बहुत अधिक होता है।

RISC आर्किटेक्चर का मुख्य फायदा यह है कि जब निर्देश (instructions) बहुत सरल होते हैं, तो प्रोसेसर उन्हें बहुत जल्दी पूरा (execute) कर लेता है। इसे आप एक उदाहरण से समझें कि यदि आपको किसी को एक बड़ा काम करने के लिए कहना है, तो उसे एक बार में समझाने के बजाय अगर आप उसे छोटे-छोटे और सरल कामों में बांट दें, तो वह उसे ज्यादा तेजी से पूरा कर पाएगा। RISC प्रोसेसर इसी सिद्धांत पर काम करते हैं, जहाँ ज्यादातर निर्देश एक ही घड़ी की चाल (clock cycle) में पूरे हो जाते हैं, जिससे पूरे सिस्टम की काम करने की गति (overall performance) बहुत बढ़ जाती है। इन्हीं खूबियों के कारण RISC का इस्तेमाल उन जगहों पर सबसे ज्यादा होता है जहाँ स्पीड और काम करने की कुशलता (efficiency) बहुत जरूरी होती है, जैसे कि हमारे स्मार्टफोन के प्रोसेसर, छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (embedded systems) और आजकल के आधुनिक कंप्यूटर।

यहाँ RISC आर्किटेक्चर की मुख्य विशेषताओं को सरल हिंदी में समझाया गया है :

  • छोटे निर्देश (Small Instruction Set) : RISC में प्रोसेसर को सिखाए जाने वाले निर्देशों (instructions) की संख्या बहुत कम और सीमित होती है।

  • सरल और तेज (Simple & Fast) : निर्देश बहुत सरल होते हैं, इसलिए प्रोसेसर उन्हें बिना किसी रुकावट के बहुत तेजी से पूरा (execute) कर लेता है।

  • तेज गति (Fast Completion) : इसकी बनावट ऐसी होती है, कि ज्यादातर निर्देश एक ही घड़ी की चाल (clock cycle) में पूरे हो जाते हैं।

  • निश्चित फॉर्मेट (Fixed Format) : इसमें सभी निर्देशों का आकार और लिखने का तरीका एक समान (fixed) होता है, जिससे प्रोसेसर उन्हें आसानी से समझ लेता है।

  • ज्यादा रजिस्टर (More Registers) : प्रोसेसर के अंदर बहुत सारे तेज मेमोरी वाले हिस्से (registers) होते हैं, जिससे उसे बार-बार मुख्य मेमोरी (RAM) के पास नहीं जाना पड़ता।

  • सीमित मेमोरी एक्सेस (Limited Memory Access) : डेटा को मेमोरी से लाने या वापस भेजने के लिए केवल कुछ ही खास निर्देश (जैसे- load और store) काम में आते हैं, बाकी काम रजिस्टर्स के अंदर ही हो जाता है।

  • पाइपलाइनिंग (Pipelining Technique) : इसमें पाइपलाइनिंग का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इसे आप एक फैक्ट्री असेंबली लाइन की तरह समझ सकते हैं, जहाँ एक निर्देश पूरा होने से पहले ही दूसरा निर्देश काम शुरू कर देता है, जिससे काम करने की रफ्तार बढ़ जाती है।

Features of RISC Architecture
(RISC Architecture की मुख्य विशेषताएँ)

  1. सरल निर्देश (Simple Instructions) : RISC में निर्देश बहुत जटिल (complex) नहीं होते। इसी कारण प्रोसेसर उन्हें जल्दी समझकर बहुत तेजी से पूरा (execute) कर सकता है।

  2. एक समान लंबाई (Fixed Instruction Length) : ज्यादातर RISC प्रोसेसर में सभी निर्देशों की लंबाई बराबर होती है। इससे प्रोसेसर के लिए उन्हें पढ़ना (decoding) बहुत आसान हो जाता है।

  3. ज्यादा रजिस्टर (Large Number of Registers) : इसमें प्रोसेसर के पास बहुत सारे रजिस्टर होते हैं। रजिस्टर की संख्या ज्यादा होने से प्रोसेसर डेटा को तुरंत इस्तेमाल कर पाता है, और उसे बार-बार मुख्य मेमोरी (RAM) के पास नहीं जाना पड़ता।

  4. लोड/स्टोर का तरीका (Load/Store Mechanism) : इस आर्किटेक्चर में प्रोसेसर सीधे मेमोरी पर काम नहीं करता। पहले डेटा को रजिस्टर में लोड (load) किया जाता है, काम पूरा होने के बाद उसे स्टोर (store) निर्देश द्वारा वापस मेमोरी में भेजा जाता है।

  5. बेहतर पाइपलाइनिंग (Better Pipelining) : निर्देश सरल होने की वजह से प्रोसेसर एक ही समय में कई निर्देशों के अलग-अलग चरणों (stages) पर काम कर सकता है, जैसे एक पाइपलाइन में काम चलता है।

  6. एक घड़ी चक्र में एक निर्देश (One Instruction per Clock Cycle) : अधिकांश RISC प्रोसेसर इस तरह बनाए जाते हैं, कि वे लगभग हर निर्देश को एक ही घड़ी की चाल (clock cycle) में पूरा कर सकें।

  7. कम मेमोरी एक्सेस (Reduced Memory Access) : चूंकि ज्यादातर काम रजिस्टर्स के अंदर ही हो जाते हैं, इसलिए मेमोरी तक बार-बार जाने की जरूरत नहीं पड़ती (reduced memory access), जिससे काम करने की रफ्तार (processing speed) काफी बढ़ जाती है।

RISC Architecture Working Concept

RISC (रिड्यूस्ड इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर) Architecture का काम करने का तरीका बहुत ही सीधा है, जो पूरी तरह से तेजी से काम निपटाने (fast execution) पर टिका है। इसमें प्रोसेसर को बहुत ही सरल निर्देश (instructions) दिए जाते हैं, जिन्हें वह एक पल में समझकर पूरा कर लेता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ज्यादातर काम प्रोसेसर के अपने अंदरूनी छोटे और तेज मेमोरी वाले हिस्सों (registers) में ही हो जाते हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं, कि अगर प्रोसेसर को किसी बड़े काम के लिए डेटा चाहिए, तो वह बार-बार मुख्य मेमोरी (RAM) के पास नहीं दौड़ता। वह केवल खास ‘लोड’ (load) निर्देश का इस्तेमाल करके डेटा को अपने पास लाता है, और काम खत्म होने के बाद ‘स्टोर’ (store) निर्देश के जरिए, उसे वापस मेमोरी में सुरक्षित रख देता है। इस तरह कम समय में ज्यादा काम निपटाने की क्षमता ही RISC को बहुत ही प्रभावशाली और तेज बनाती है।

RISC आर्किटेक्चर में काम करने की प्रक्रिया बहुत ही व्यवस्थित और तेज होती है। इसे आप नीचे दिए गए आसान चरणों में समझ सकते हैं :

  • निर्देश लाना (Instruction Fetch – IF) : सबसे पहले प्रोसेसर मुख्य मेमोरी (RAM) से उस निर्देश (instruction) को खोजकर अपने पास लाता है जिसे उसे पूरा करना है।

  • निर्देश समझना (Instruction Decode – ID) : इसके बाद प्रोसेसर का कंट्रोल यूनिट (control unit) उस निर्देश को पढ़ता है, और यह समझता है, कि उसे आखिर करना क्या है।

  • रजिस्टर से डेटा लेना (Register Access) : काम करने के लिए जिस डेटा (data) की जरूरत होती है, उसे प्रोसेसर के अंदर मौजूद बहुत तेज मेमोरी वाले हिस्से (registers) से तुरंत ले लिया जाता है।

  • काम पूरा करना (Execution – EX) : प्रोसेसर का मुख्य गणितीय हिस्सा, जिसे ALU (अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट) कहते हैं, वह निर्देश के अनुसार जोड़-घटाव या तार्किक (logical) काम पूरा करता है।

  • परिणाम लिखना (Write Back / Store) : अंत में, जो परिणाम (result) निकलता है, उसे या तो वापस रजिस्टर में सुरक्षित रख दिया जाता है, या फिर मेमोरी में भेज दिया जाता है।

RISC Processor Examples :

आजकल के ज्यादातर आधुनिक प्रोसेसर RISC तकनीक का ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि यह कम बिजली खर्च करके बहुत तेजी से काम करते हैं। यहाँ कुछ मुख्य उदाहरण दिए गए हैं :

  • ARM प्रोसेसर : यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रोसेसर हैं। इनका इस्तेमाल हमारे स्मार्टफोन, टैबलेट और छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में सबसे ज्यादा होता है क्योंकि ये बहुत कम बिजली (power consumption) की खपत करते हैं।

  • MIPS प्रोसेसर : इसका इस्तेमाल ज्यादातर नेटवर्किंग उपकरणों (जैसे राउटर) और कुछ खास तरह के एम्बेडेड सिस्टम (embedded systems) में किया जाता है, जहाँ परफॉर्मेंस बहुत जरूरी होती है।

  • SPARC प्रोसेसर : यह मुख्य रूप से बड़े सर्वर और सुपर कंप्यूटर (supercomputers) में काम आते हैं, जहाँ बहुत ज्यादा डेटा को एक साथ प्रोसेस करना पड़ता है।

  • PowerPC : इसका इस्तेमाल पहले कंप्यूटरों (जैसे एप्पल के पुराने मैक) और गेमिंग कंसोल (gaming consoles) में किया जाता था।

Advantages of RISC Architecture (लाभ)

  • तेज प्रोसेसिंग (High Speed Processing) : इसमें निर्देश (instructions) बहुत सरल होते हैं, जिन्हें प्रोसेसर पलक झपकते ही पूरा (execute) कर लेता है, जिससे काम करने की रफ्तार बहुत बढ़ जाती है।

  • बेहतर पाइपलाइनिंग (Efficient Pipelining) : इसमें पाइपलाइनिंग को लागू करना बहुत सरल होता है। यह एक असेंबली लाइन की तरह काम करती है, जहाँ प्रोसेसर एक निर्देश के पूरा होने का इंतज़ार किए बिना ही दूसरे निर्देश पर काम शुरू कर देता है, जिससे पूरे सिस्टम की परफॉर्मेंस (performance) बेहतर हो जाती है।

  • सरल हार्डवेयर डिज़ाइन (Simple CPU Design) : चूँकि इसमें सिखाए जाने वाले निर्देशों की संख्या कम होती है, इसलिए प्रोसेसर का अंदरूनी ढांचा (hardware design) बहुत सरल और कुशल (efficient) रहता है।

  • कम बिजली की खपत (Low Power Consumption) : RISC प्रोसेसर बिजली का बहुत कम इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि ये स्मार्टफोन, टैबलेट और छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (embedded systems) के लिए सबसे पहली पसंद हैं, जिससे बैटरी लंबे समय तक चलती है।

  • दोहराए जाने वाले कामों में बेहतर (Better Performance for Repetitive Tasks) : यदि प्रोसेसर को एक ही तरह का काम बार-बार करना पड़े, तो सरल निर्देशों के कारण यह उसे बहुत कम समय में निपटा लेता है।

Disadvantages of RISC Architecture (कमियाँ)

  • प्रोग्राम का बड़ा आकार (Large Program Size) : चूँकि इसमें निर्देश (instructions) बहुत सरल और छोटे होते हैं, इसलिए एक बड़े काम को पूरा करने के लिए बहुत सारे निर्देशों को जोड़ना पड़ता है। इस वजह से प्रोग्राम का कुल आकार बड़ा हो जाता है।

  • ज्यादा मेमोरी का इस्तेमाल (Higher Memory Usage) : निर्देशों की संख्या ज्यादा होने के कारण, उन्हें रखने के लिए कंप्यूटर की मेमोरी (RAM) में अधिक जगह की जरूरत पड़ सकती है।

  • कंपाइलर पर निर्भरता (Compiler Dependency) : RISC में काम को सही और तेज तरीके से करने के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली और चतुर कंपाइलर (powerful compiler) की जरूरत होती है। कंपाइलर वह प्रोग्राम है, जो हमारे लिखे कोड को प्रोसेसर की भाषा में बदलता है।

  • सॉफ्टवेयर बनाना कठिन (Complex Software Development) : इसमें किसी एक जटिल काम (complex operation) को करने के लिए प्रोग्रामर को कई सारे छोटे-छोटे निर्देश लिखने पड़ते हैं, जिससे कभी-कभी सॉफ्टवेयर तैयार करना थोड़ा मुश्किल और लंबा काम हो जाता है।

CISC Architecture (CISC क्या है?)

CISC का पूरा नाम ‘कॉम्प्लेक्स इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर’ (Complex Instruction Set Computer) है। RISC के उलट, CISC का डिज़ाइन ऐसा होता है कि यह एक ही निर्देश (instruction) के जरिए बहुत सारे जटिल (complex) काम एक साथ कर सकता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर RISC एक ऐसा वर्कर है, जिसे एक छोटा सा काम करने के लिए अलग-अलग छोटे निर्देश देने पड़ते हैं, तो CISC एक ऐसा स्मार्ट वर्कर है जिसे सिर्फ एक बार एक बड़ा आदेश देने पर वह अपने आप उन सभी छोटे-छोटे चरणों (operations) को पूरा कर लेता है। इसका मुख्य फायदा यह है, कि प्रोग्राम को चलाने के लिए कम निर्देश लिखने पड़ते हैं, जिससे कोडिंग (coding) करना आसान और छोटा हो जाता है। क्योंकि एक निर्देश के अंदर ही कई काम छिपे होते हैं, इसलिए इसमें मेमोरी (RAM) का उपयोग कम होता है, लेकिन एक निर्देश को पूरा करने में प्रोसेसर को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

मुख्य बिंदु :

  • ढेर सारे निर्देश (More Instructions) : CISC प्रोसेसर में प्रोसेसर को सिखाए जाने वाले निर्देशों (instructions) की संख्या बहुत ज्यादा और जटिल होती है।

  • एक निर्देश, कई काम (Multi-Operation Instructions) : इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल एक निर्देश ही कई छोटे-छोटे कामों को एक साथ पूरा कर सकता है।

  • निर्देशों की अलग-अलग लंबाई (Variable Length) : इसमें निर्देशों का कोई एक निश्चित आकार (fixed length) नहीं होता। काम के हिसाब से कोई निर्देश छोटा हो सकता है, तो कोई बहुत लंबा।

  • मेमोरी से सीधा जुड़ाव (Direct Memory Access) : CISC प्रोसेसर डेटा को सीधे मुख्य मेमोरी (RAM) से उठाकर उस पर काम कर सकते हैं, इसके लिए उन्हें बार-बार रजिस्टर्स (registers) पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • ज्यादा समय लगना (More Clock Cycles) : चूंकि इसके निर्देश बहुत जटिल होते हैं, इसलिए एक निर्देश को पूरा (execute) करने में प्रोसेसर को कई बार एक से ज्यादा घड़ी की चाल (clock cycle) का समय लग सकता है।

  • कम रजिस्टर्स (Fewer Registers) : RISC के मुकाबले, CISC प्रोसेसर के अंदर रजिस्टर्स की संख्या कम होती है, क्योंकि यह सीधे मेमोरी के साथ काम करने में सक्षम है।

  • छोटा प्रोग्राम (Smaller Program Size) : क्योंकि एक ही निर्देश बहुत सारे काम कर सकता है, इसलिए पूरे प्रोग्राम को लिखने के लिए कम निर्देशों की जरूरत होती है। इससे प्रोग्राम का कुल आकार (program size) छोटा रहता है।

 

Features of CISC Architecture
(CISC Architecture की मुख्य विशेषताएँ)

  • निर्देशों का बड़ा सेट (Large Instruction Set) : CISC प्रोसेसर के पास निर्देशों (instructions) का एक बहुत बड़ा खजाना होता है, जिसमें हर तरह के छोटे-बड़े काम के लिए निर्देश मौजूद होते हैं।

  • जटिल निर्देश (Complex Instructions) : इसमें एक ही निर्देश बहुत सारे काम (operations) एक साथ कर सकता है, जैसे मेमोरी से डेटा उठाना और तुरंत उसका हिसाब (calculation) लगा देना।

  • बदलती लंबाई (Variable Instruction Length) : इसमें निर्देशों का आकार एक जैसा (fixed) नहीं होता। काम कितना बड़ा या छोटा है, उसी हिसाब से निर्देश की लंबाई कम या ज्यादा हो सकती है।

  • मेमोरी से मेमोरी तक काम (Memory-to-Memory Operations) : यह प्रोसेसर सीधे मुख्य मेमोरी (RAM) से डेटा लेकर उस पर काम कर सकता है, और परिणाम को वापस मेमोरी में भेज सकता है।

  • कम रजिस्टर (Less Number of Registers) : चूंकि यह सीधे मेमोरी (RAM) के साथ तालमेल बिठाकर काम कर सकता है, इसलिए इसके अंदर डेटा रखने वाले छोटे हिस्सों (registers) की संख्या कम होती है।

  • ज्यादा समय (Multiple Clock Cycles) : निर्देश जटिल और भारी होने के कारण, उन्हें पूरी तरह खत्म (execute) करने में प्रोसेसर को घड़ी के कई चक्कर (clock cycles) लगाने पड़ सकते हैं।

  • कठिन बनावट (Complex CPU Design) : इतने सारे और भारी निर्देशों को समझने के लिए प्रोसेसर के अंदरूनी हार्डवेयर का ढांचा (hardware design) बहुत पेचीदा और जटिल होता है।

 

CISC Architecture Working Concept

CISC (कॉम्प्लेक्स इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर) आर्किटेक्चर का मुख्य लक्ष्य एक ही बार में बड़ा काम करना है। इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि यह जटिल निर्देशों (complex instructions) को समझ सके, जहाँ एक ही निर्देश कई सारे छोटे-छोटे कामों (operations) को एक साथ पूरा करने की ताकत रखता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रोग्रामर को अपना कोड (code) लिखने के लिए बहुत कम निर्देश लिखने पड़ते हैं, जिससे कम लाइनें लिखकर भी ज्यादा काम हो जाता है। आसान शब्दों में कहें तो, जहाँ RISC को एक बड़ा काम करने के लिए कई बार टुकड़ों में निर्देश देने पड़ते हैं, वहीं CISC उस पूरे काम को एक ही ‘शक्तिशाली’ निर्देश के जरिए तुरंत निपटाने की कोशिश करता है। इसी खूबी के कारण कोडिंग का काम आसान हो जाता है और प्रोग्राम का आकार (program size) छोटा रहता है।

Working Process (कार्य करने की प्रक्रिया)

CISC आर्किटेक्चर में काम करने की प्रक्रिया काफी विस्तृत होती है। इसे आप नीचे दिए गए आसान चरणों में समझ सकते हैं:

  • निर्देश लाना (Instruction Fetch) : सबसे पहले प्रोसेसर मुख्य मेमोरी (RAM) से उस निर्देश (instruction) को ढूँढकर अपने पास लाता है, जिसे पूरा करना है।

  • निर्देश समझना (Instruction Decode) : इसके बाद प्रोसेसर का कंट्रोल यूनिट (control unit) उस जटिल निर्देश को पढ़ता है, और यह तय करता है, कि उसे क्या-क्या काम करने हैं।

  • मेमोरी से डेटा लेना (Memory Access) : यह CISC की सबसे बड़ी खासियत है, यह प्रोसेसर सीधे मुख्य मेमोरी (RAM) से डेटा (data) ले सकता है, उसे रजिस्टर्स में लाने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • काम पूरा करना (Execution) : प्रोसेसर का मुख्य हिस्सा, जिसे ALU (अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट) कहते हैं, निर्देश के अनुसार जोड़-घटाव या अन्य जटिल तार्किक (logical) काम पूरे करता है।

  • परिणाम सुरक्षित करना (Store Result) : अंत में जो परिणाम (result) निकलता है, उसे या तो सीधे मेमोरी में या फिर रजिस्टर में सुरक्षित (store) कर दिया जाता है।

CISC तकनीक का इस्तेमाल उन बड़े कंप्यूटरों और लैपटॉप में ज्यादा होता है, जहाँ बहुत भारी काम करने होते हैं। इसके कुछ प्रमुख उदाहरण यहाँ दिए गए हैं:

  • Intel x86 (इंटेल x86) : यह दुनिया का सबसे मशहूर CISC प्रोसेसर है। हमारे घर और ऑफिस में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर डेस्कटॉप और लैपटॉप (जैसे Intel Core i3, i5, i7) इसी तकनीक पर काम करते हैं।

  • AMD प्रोसेसर (AMD Processors) : इंटेल की तरह ही AMD के प्रोसेसर (जैसे Ryzen सीरीज) भी CISC आर्किटेक्चर का इस्तेमाल करते हैं। ये गेमिंग और भारी सॉफ्टवेयर चलाने के लिए बहुत शक्तिशाली (powerful) माने जाते हैं।

  • VAX (वैक्स) : यह एक पुराना लेकिन बहुत प्रसिद्ध कंप्यूटर सिस्टम है जिसने जटिल निर्देशों (complex instructions) के इस्तेमाल की शुरुआत की थी। इसका उपयोग बड़े वैज्ञानिक कामों और डेटा रखने (data processing) के लिए किया जाता था।

Advantages of CISC Architecture (लाभ)

CISC (कॉम्प्लेक्स इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर) आर्किटेक्चर के प्रमुख लाभों को आप नीचे दिए गए सरल बिंदुओं में समझ सकते हैं :

  • छोटे प्रोग्राम (Shorter Programs) : इसमें जटिल निर्देशों (complex instructions) की शक्ति इतनी ज्यादा होती है कि एक बड़ा काम करने के लिए बहुत कम निर्देशों की जरूरत पड़ती है, जिससे पूरे प्रोग्राम का आकार छोटा हो जाता है।

  • आसान प्रोग्रामिंग (Easy Programming) : क्योंकि प्रोसेसर के पास पहले से ही जटिल कामों को करने वाले निर्देश मौजूद होते हैं, इसलिए प्रोग्रामर को अपना कोड (code) लिखने में कम मेहनत करनी पड़ती है और कोडिंग करना सरल हो जाता है।

  • कम मेमोरी की जरूरत (Less Memory Requirement) : निर्देशों की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए पूरे प्रोग्राम को कंप्यूटर की मेमोरी (RAM) में रखने के लिए बहुत कम जगह की आवश्यकता होती है।

  • शक्तिशाली निर्देश (Powerful Instructions) : इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है, कि एक ही निर्देश (instruction) एक साथ कई छोटे-छोटे काम (operations) निपटा सकता है। इससे बड़े और जटिल काम (complex tasks) बहुत आसानी से पूरे हो जाते हैं।

Disadvantages of CISC Architecture (कमियाँ)

  • पेचीदा बनावट (Complex CPU Design) : बहुत सारे और भारी निर्देशों (instructions) को समझने के लिए प्रोसेसर का अंदरूनी ढांचा या हार्डवेयर बहुत ही उलझा हुआ और पेचीदा (complex) हो जाता है।

  • धीमी रफ़्तार (Slower Execution) : चूंकि इसके निर्देश बहुत बड़े और जटिल होते हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह खत्म करने में प्रोसेसर को घड़ी के कई चक्कर (multiple clock cycles) लगाने पड़ते हैं, जिससे काम की गति धीमी हो सकती है।

  • पाइपलाइनिंग में मुश्किल (Difficult Pipelining) : निर्देशों के कठिन होने के कारण ‘पाइपलाइनिंग’ तकनीक (जहाँ एक साथ कई काम चलते हैं) को सही तरीके से लागू (implement) करना बहुत मुश्किल होता है।

  • ज्यादा बिजली की खपत (Higher Power Consumption) : इसके भारी और जटिल हार्डवेयर डिज़ाइन के कारण, यह प्रोसेसर चलते समय बहुत ज्यादा बिजली (power) खर्च करता है और जल्दी गर्म भी हो सकता है।

Difference Between RISC and CISC
(RISC और CISC में अंतर)

 

Basis RISC (Reduced Instruction Set Computer) CISC (Complex Instruction Set Computer)
Instruction Set Instructions की संख्या कम होती है Instructions की संख्या अधिक होती है
Instruction Type Instructions simple होती हैं Instructions complex होती हैं
Execution Time अधिकांश instructions एक clock cycle में execute होती हैं Instructions को execute करने में कई clock cycles लग सकते हैं
Instruction Length Instruction length generally fixed होती है Instruction length variable होती है
Registers Registers की संख्या अधिक होती है Registers की संख्या comparatively कम होती है
Memory Access Memory access कम होता है Memory access अधिक होता है
Program Size Program size बड़ा हो सकता है Program size छोटा होता है
CPU Design Processor design simple होता है Processor design complex होता है
Pipelining Pipelining आसानी से implement होती है Pipelining implement करना कठिन होता है
Examples ARM, MIPS, SPARC Intel x86, AMD

Conclusion (निष्कर्ष)

  • निर्देशों का खेल (Instruction Style) : RISC में निर्देश बहुत ही सरल और छोटे (simple instructions) होते हैं, जो प्रोसेसर को बहुत तेज रफ्तार देते हैं। वहीं, CISC में निर्देश जटिल और शक्तिशाली (complex instructions) होते हैं, जिससे एक ही निर्देश में कई काम हो जाते हैं।

  • रफ्तार बनाम काम (Speed vs Task) : RISC आर्किटेक्चर ‘पाइपलाइनिंग’ तकनीक की मदद से काम को बहुत तेजी से निपटाता है। इसके विपरीत, CISC का ध्यान इस पर होता है कि कम लाइनों का कोड लिखकर बड़ा काम कैसे किया जाए, जिससे प्रोग्रामिंग आसान (easy programming) हो जाती है।

  • प्रोग्राम का आकार (Program Size) : RISC में निर्देशों की संख्या ज्यादा होने से प्रोग्राम का आकार बड़ा हो सकता है। इसके उलट, CISC में शक्तिशाली निर्देशों के कारण प्रोग्राम का आकार छोटा (smaller size) रहता है।

  • आधुनिक मेल-जोल (Modern Trend) : आज के जमाने के आधुनिक प्रोसेसर में केवल एक ही तकनीक का उपयोग नहीं होता, बल्कि वे RISC और CISC दोनों की खूबियों को मिलाकर (combination) बनाए जाते हैं, ताकि वे तेज भी हों और जटिल काम भी आसानी से कर सकें।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • RISC का पूरा नाम क्या है?
    रिड्यूस्ड इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर (Reduced Instruction Set Computer)।
  • CISC का पूरा नाम क्या है?
    कॉम्प्लेक्स इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर (Complex Instruction Set Computer)।

  • RISC आर्किटेक्चर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    इसका मुख्य लक्ष्य बहुत ही सरल निर्देशों (simple instructions) का इस्तेमाल करके काम करने की रफ्तार को तेज (fast processing) बनाना है।

  • CISC आर्किटेक्चर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    इसका मकसद बहुत ही कम निर्देशों (less instructions) का उपयोग करके ज्यादा से ज्यादा और बड़े काम पूरे करना है।

  • स्मार्टफोन में कौन सा आर्किटेक्चर सबसे ज्यादा उपयोग होता है?
    स्मार्टफोन में ज्यादातर RISC तकनीक (जैसे ARM प्रोसेसर) का इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह बैटरी कम खर्च करती है और तेज चलती है।

  • डेस्कटॉप कंप्यूटर और लैपटॉप में कौन सा आर्किटेक्चर उपयोग होता है?
    डेस्कटॉप और लैपटॉप में ज्यादातर CISC तकनीक (जैसे Intel और AMD प्रोसेसर) का उपयोग होता है, क्योंकि ये भारी और जटिल सॉफ्टवेयर चलाने में माहिर होते हैं।

error: Content is protected !!