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ER data model

Entity Relationship Data Model

Entity Relationship Model किसी संस्‍थान या बिजनेस समूह के डाटा का विस्‍तृत लॉजिकल रिप्रेजेंटेशन होता हैं। एक E-R Model को आमतौर पर एंटिटी रिलेशनशिप चित्र (या E-R चित्र) के रूप में व्‍यक्‍त किया जाता हैं। यह E-R मॉडल का ग्राफिक प्रस्‍तुतिकरण होता हैं। Entity Relationship Model रियल वर्ल्‍ड (डाटा) के नियमों पर आधारित होता हैं, जो बेसिक ऑब्‍जेक्‍ट्स के सेट जिन्‍हें एंटिटिज कहते हैं और इन ऑब्‍जेक्‍ट के बीच संबंधों से निर्मित होता हैं।

E-R मॉडल के घटक तत्‍व (Elements of ER Model)

इस अध्‍याय में हम E-R मॉडल के घटक तत्‍वों का परिचय लेंगे और साथ में E-R चित्र में उनका प्रस्‍तुतिकरण भी देखेंगे। E-R मॉडल ERD’S का आधार बनाता हैं। ERD डाटाबेस का अवधारणात्‍मक दृष्टिकोण दर्शाता हैं। ERD’S तीन मुख्‍य घटक तत्‍व एंटिटी-एट्रीब्‍यूट और रिलेशनशिप दर्शाता हैं।

एंटीटी(Entity)

एंटीटी रियल वर्ल्‍ड में कोई व्‍यक्ति, स्‍थान, वस्‍तु, घटना अवधारणा होती हैं, जो अन्‍य सारे ऑब्‍जेक्‍ट्स से भिन्‍न होती हैं। एंटीटी में प्रापर्टीज का सेट होता हैं और प्रापर्टीज के कुछ सेट की वैल्‍यू विशिष्‍ट तरीके से एंटीटी की पहचान कर सकती हैं। एंटीटी, एट्रीब्‍यूट्स के सेट से दर्शाई जाती हैं। प्रत्‍येक एट्रीब्‍यूट के लिए स्‍वीकार्य वैल्‍यूज का सेट होता हैं जिसे डोमेन या उस एट्रीब्‍यूट का वैल्‍यू सेट कहते हैं। इनमें से प्रत्‍येक प्रकार की एंटीटी के उदाहरण इस प्रकार हैं –

व्‍यक्ति – कर्मचारी, विद्यार्थी आदि


स्‍थान – शहर, राज्‍य, देश

वस्‍तु – मशीन, इमारत,

घटना – विक्रय, पंजीयन, नवीनीकरण,

अवधारणा – रवाना, पाठ्यक्रम, वर्क सेंटर

एंटीटी सेट

एंटीटी सेट एक ही प्रकार की एंटीटी का सेट होता हैं। इन एंटीटी की प्रापर्टी या एट्रीब्‍यूट समान होते हैं। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं –

* किसी बैंक के ग्राहकों के  सेट। इसे एंटीटी सेट ‘कस्‍टमर’ के रूप में डिफाइन किया जा सकता हैं।

* किसी बैंक विशेष द्वारा दिए गए सभी प्रकार के ऋण। इसे एंटीटी सेट लोन के रूप में डिफाइन किया जा सकता हैं।

एंटीटी के भी दो प्रकार होते हैं


  1. स्‍ट्रांग एंटीटी (Strong Entity) : स्‍ट्रांग एंटीटी सेट वह होता हैं जिनका अस्तित्‍व अन्‍य एंटीटी सेट्स से स्‍वतंत्र होता हैं। दूसरे शब्‍दों में जिस एंटीटी सेट की प्रायमरी की होती हैं, उसे स्‍ट्रांग एंटीटी सेट कहते हैं।
  2. वीक एंटीटी (Weak Entity) : वीक एंटीटी वह होती हैं, जिसका अस्तित्‍व किसी अन्‍य एंटीटी सेट पर निर्भर करता हैं। दूसरे शब्‍दों में ऐसा एंटीटी सेट जिसके पास प्रायमरी की बनाने के लिए पर्याप्‍त एट्रीब्‍यूट नहीं हो उसे वीक एंटीटी सेट कहते हैं।

एट्रीब्‍यूट्स

एट्रीब्‍यूट्स को एंटीटी की प्रापर्टी या कैरेक्‍टरिस्टिक्‍स के रूप में डिफाइन किया जा सकता हैं। प्रत्‍येक एंटीटी सेट में इसके साथ जुड़े एट्रीब्‍यूट्स का सेट होता हैं। नीचे कुछ आम एंटीटी सेट इसके एट्रीब्‍यूट्स के साथ दिये गए हैं –

Student – Student id Student name Address Phone no.

Employee – Employee id, Employee name, Designation, Brunch.

Account – Account no. Account type, Balance

ER मॉडल में उपयोग में लाए गये एट्रीब्‍यूट्स को निम्‍न एट्रीब्‍यूट टाईप से चित्रित किया जा सकता हैं –

  1. सिंगल और कंपोजिट एट्रीब्‍यूट्स :- एक सिंगल या एटॉमिक एट्रीब्‍यूट वे होते हैं, जो छोटे सबपार्ट में नहीं तोड़े जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, एट्रीब्‍यूट स्‍टूडेन्‍ट ID को उपहिस्सों में नहीं विभाजित किया जा सकता हैं। कंपोजिट एट्रीब्‍यूट वे होते हैं, जिन्‍हें और छोटे हिस्‍सों में बाँटा जा सकता हैं। उदाहरण के लिए एट्रीब्‍यूट स्‍टूडेन्‍ट नेम को तीन उपभागों में विभाजित किया जा सकता हैं। प्रथम नाम, मध्‍य नाम, अंतिम नाम।
  2. सिंगल वैल्‍यू और मल्‍टी वैल्‍यू एट्रीब्‍यूट :- किसी एट्रीब्‍यूट को सिंगल वैल्‍यू एट्रीब्‍यूट कहते हैं यदि इसमें केवल एक ही वैल्‍यू हो सकती हैं। उदाहरण – एक अकाउंट बैलेंस में एक बार में एक ही वैल्‍यू हो सकती हैं। यह सिंगल वैल्‍यू एट्रीब्‍यूट का ही उदहारण हैं। किसी एट्रीब्‍यूट को मल्‍टीवैल्‍यू एट्रीब्‍यूट तब कहते हैं जब इसमें एक से ज्‍यादा वैल्‍यू संभव हो। उदाहरण के लिए एक एंटीटी स्‍टूडेन्‍ट की कई मल्‍टी वैल्‍यू हाबी एट्रीब्‍यूट हो सकती हैं, जैसे पढ़ना, संगीत सुनना, फिल्‍में देखना, आदि।
  3. स्‍टोर्ड एवं डिराईव एट्रीब्‍यूट्स एक एट्रीब्‍यूट जो किसी एंटीटी के लिए एट्रीब्‍यूट के रूप में पहले से मौजूद हो वह स्‍टोर्ड या बेस एट्रीब्‍यूट कहलाता हैं। ऐसा एट्रीब्‍यूट जो किसी स्‍टोर्ड एट्रीब्‍यूट से लिया जाता हैं, जो पहले से एंटीटी के लिए मौजूद नहीं हो, तो इसे डिराइव एट्रीब्‍यूट कहते हैं। इस प्रकार के एट्रीब्‍यूट, की वैल्‍यू को अन्‍य संबंधित एट्रीब्‍यूट या एंटीटी की वैल्‍यू से निकाला जा सकता हैं। उदाहरण के तौर पर : किसी कर्मचारी के कार्यकाल की गणना एंटीटी इम्‍प्‍लाई के एट्रीब्‍यूट ज्‍वाईनिंग डेट से की जा सकती हैं। यहाँ ज्‍वाईनिंग डेट स्‍टोर्ड या बेस एट्रीब्‍यूट हैं। यह एंटीटी इम्‍प्‍लाई के एट्रीब्‍यूट में से एक हैं और इम्‍प्‍लाईमेंट डयूरेशन (कार्यकाल) डिराईव्‍ड एट्रीब्‍यूट हैं क्‍योंकि इसे कर्मचारी के ज्‍वाईनिंग डेट एट्रीब्‍यूट से निकाला गया हैं। इम्‍प्‍लायमेंट ड्यूरेशन एंटीटी इम्‍प्‍लाई का एट्रीब्‍यूट नहीं हैं।
  4. नल एट्रीब्‍यूट :– ऐसा एट्रीब्‍यूट जिसमें नल वैल्‍यू हो सकती हैं, नल एट्रीब्‍यूट कहलाता हैं। नल वैल्‍यू का उपयोग तब किया जाता हैं, जब एंटीटी के पास एट्रीब्‍यूट के लिए वैल्‍यू नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए किसी एंटीटी इम्‍प्‍लाई के एट्रीब्‍यूट फोन नंबर में वैल्‍यू हो भी सकती हैं और नहीं भी हो सकती हैं। सभी कर्मचारियों के पास फोन हो, यह जरूरी नहीं। यहाँ फोन नंबर नल एट्रीब्‍यूट हैं।

रिलेशन (या टेबल)

रिलेशन या टेबल इन शब्‍दावलियों का उपयोग अदल-बदल कर किया जा सकता हैं। प्रत्‍येक रिलेशन, नेम्‍ड कॉलम हैं। रिलेशन की प्रत्‍येक रो उस रिकॉर्ड से संबंधित होती हैं, जिसमें सिंगल एंटीटी के लिए डाटा एट्रीब्‍यूट वैल्‍यूज होती हैं।

एक रिलेशन में निम्‍न प्रापर्टीज होती हैं

  1. किसी टेबल के किसी भी दिए हुए कॉलम में सभी आयटम समान प्रकार के होते हैं। जबकि भिन्‍न कॉलम में आयटम आवश्‍यक नहीं कि समान हो।
  2. रो के लिए, प्रत्‍येक कॉलम में एटामिक (अविभाज्‍य) वैल्‍यू होना चाहिए और रो के लिए ही, एक कॉलम में एक से ज्‍यादा वैल्‍यू नहीं हो सकती हैं।
  3. किसी रिलेशन की सभी रो विशिष्‍ट होती हैं। अर्थात् एक रिलेशन में ऐसी दो रो नहीं होती हैं, जो प्रत्‍येक कॉलम में समान हों। इसका मतलब हैं, रिलेशन की प्रत्‍येक रो इसके कंटेट से विशिष्‍ट रूप से आयडेंटीफाय की जा सकती हैं।
  4. किसी रिलेशन में रो के क्रम का कोई महत्‍व नहीं होता हैं। अर्थात् हम यह कहकर कुछ भी रिट्राईव नहीं कर सकते हैं कि रो नंबर 5 में कॉलम नेम एक्‍सेस किया जाता हैं। किसी रिलेशन में कोई ऑर्डर रो के लिए मेनटेन नहीं किया जा सकता हैं।
  5. किसी रिलेशन के कॉलम्‍स को विशिष्‍ट नाम असाइन किये जाते हैं। इन कॉलम्‍स के क्रम का कोई महत्‍व नहीं होता हैं।

रिलेशनशिप सेट

रिलेशनशिप कई एंटीटीज के बीच साझेदारी होती हैं। रिलेशनशिप वह गोंद हैं, जो E-R मॉडल के विभिन्‍न तत्‍वों को जोडे रखती हैं। रिलेशनशिप सेट एक ही प्रकार के रिलेशनशिप का सेट होता हैं। उदाहरण के लिए कोई भी ग्राहक बैंक द्वारा दिया जाने वाला किसी प्रकार का लोन (बिजनेस लोन, पर्सनल लोन, होम लोन) ले सकता हैं। इसलिए ग्राहक और उनके द्वारा लिए लोन के बीच सारी रिलेशनशिप कुल मिलाकर रिलेशनशिप सेट कहलाएगी।

रिलेशनशिप की डिग्री (Degree of Relationship)

रिलेशनशिप की डिग्री, एंटीटी टाईम्‍स की वह संख्‍या हैं, जो रिलेशनशिप में भागीदार हैं। E-R मॉडल में तीन सबसे आम रिलेशनशिप हैं, यूनरी (डिग्री 1) बाइनरी (डिग्री 2) और टर्नरी (डिग्री 3)। इन तीनों रिलेशनशिप के उदाहरण चित्रो में नीचे दिए गए हैं –

1. यूनरी रिलेशनशिप (Unary Relationship):– यूनरी रिलेशनशिप सिंगल एंटीटी टाईप के इंस्‍टंस के बीच रिलेशनशिप होती हैं (यूनरी रिलेशनशिप को रिकर्सिव रिलेशनशिप भी कहते हैं)। दो उदाहरण चित्र में दिए गए हैं। पहले उदाहरण में “IS-MARRIED-TO” को PERSON एंटीटी टाईप के इंस्‍टेंस के बीच वन-टू-वन रिलेशनशिप के रूप में दिखाया गया हैं। दूसरे उदाहरण में “MANAGES” को EMPLOYEE एंटीटी टाईप के इंस्‍टेंस के बीच वन-टू-मेनी रिलेशनशिप के रूप में दर्शाया गया हैं।

2. बायनरी रिलेशनशिप (Binary Relationship):- बायनरी रिलेशनशिप दो एंटीटी टाइप्‍स के इंस्‍टेंस के बीच रिलेशनशिप हैं और डाटा मॉडलिंग की यह सबसे आम प्रकार की रिलेशनशिप हैं। चित्र में तीन उदाहरण दिए गए हैं। पहला (वन – टू – वन) यह दर्शाता हैं कि एक कर्मचारी को एक पार्किंग का स्‍थान असाइन किया गया हैं और प्रत्‍येक पार्किंग प्‍लेस एक कर्मचारी के नाम असाईड हैं। दूसरा (वन – टू – मेनी) यह बताता हैं कि प्रोडक्‍ट केवल एक प्रोडक्‍ट लाइन से होता हैं। तीसरे (मेनी टू मेनी) उदाहरण में यह बताया गया हैं कि विद्यार्थी एक से अधिक पाठ्यक्रम में पंजीयन करा सकते हैं और प्रत्‍येक पाठ्यक्रम में कई स्‍टूडेंट पंजीयन कराने वाले हो सकते हैं।

3. टर्नरी रिलेशनशिप (Ternary Relationship) :– टर्नरी रिलेशनशिप तीन एंटीटी टाईप्‍स के इंस्‍टेंस के बीच सायमलटेनियस (एक साथ) रिलेशनशिप हैं। चित्र में बिजनेस में ऐसी आदर्श स्थिति दर्शाई गई जो, टर्नरी रिलेशनशिप का कारण बनती हैं। इस उदाहरण में वेंडर, वेयरहाऊस को विभिन्‍न पार्ट्स सप्‍लाई कर सकते हैं। रिलेशनशिप सप्‍लाई वे विशिष्‍ट पार्ट्स रिकॉर्ड करती हैं, जो कई वेंडर विशेष द्वारा किसी खास वेयरहाऊस को सप्‍लाई किए जाते हैं। इस प्रकार वहाँ तीन तीन एंटीटी टाईप हो जाते हैं : वेंडर, पार्ट और वेयरहाऊस। रिलेशनशिप सप्‍लाईज पर रो एट्रीब्‍यूट हैं – SHIPPING MODE और UNIT-COST। उदाहरण के लिए सप्‍लाईज का एक इंस्‍टेंट यह फेक्‍ट रिकॉर्ड कर सकता हैं कि वेंडर X , पार्ट C वेयरहाऊस , Y को शीप कर सकता हैं और यह कि शिपिंग मोड नेक्‍स्‍ट-डे एयर हैं और लागत हैं प्रति यूनिट 5 रूपये।

Keys

Keys वे एट्रीब्‍यूट या एट्रीब्‍यूट्स के सेट हैं जिनका उपयोग एंटीटी सेट में एक एंटीटी को दूसरी से अलग करने में किया जाता हैं।

1. सुपर की (Super Key) :- यह ऐसे एक या अधिक एट्रीब्‍यूट का सेट होता हैं, जो विशिष्‍ट तरीके से किसी एंटीटी सेट में एंटीटी को पहचान सकता हैं। सुपर-की के किसी सुपरसेट को भी सुपर की के रूप में लिया जा सकता हैं। इसे निम्‍न उदाहरण से अच्‍छी तरह समझा जा सकता हैं –

माना कि एक एंटीटी के चार एट्रीब्‍यूट A, B, C, और D हैं। यदि एट्रीब्‍यूट A किसी एंटीटी

की विशिष्‍ट पहचान कर सकता हैं, तो A  उस एंटीटी के लिए सुपर-की हैं। इसी तरह किसी एट्रीब्‍यूट या एट्रीब्‍यूट्स का एट्रीब्‍यूट A के साथ काम्बिनेशन सुपर की कहला सकता हैं। अर्थात् {A,B}, {A,C}, {A,D}, {A,B,C}, {A,B,D}, {A,C,D}, और {A,B,C,D} को सुपर की कहा जा सकता हैं।

2. केंडिडेट की (Candidate Key) :- वे सारे एट्रीब्‍यूट या एट्रीब्‍यूट्स के सेट जो एंटीटी को विशिष्‍ट तरीके से पहचान सकते हैं, केंडिडेट-की हैं। केवल वह की ही केंडिडेट-की हो सकती हैं, जिसका कोई भी प्रॉपर सबसेट सुपर की नहीं हैं। इसे निम्‍न उदाहरण से अच्‍छी तरह समझा जा सकता हैं –

माना कि एक एंटीटी के चार एट्रीब्‍यूट A,B,C, और D हैं। अब यदि एट्रीब्‍यूट {A} और a {C,D} दोनों किसी एंटीटी को विशिष्‍ट रूप से एंटीटी को पहचान सकते हैं, तो फिर सुपर-की की डेफिनेशन के मुताबिक निम्‍न भी सुपर-की हैं : A के संबंध में – {A}, {A,B}, {A,C}, {A,D}, {A,B,C}, {A,B,D}, {A,C,D}, {A,B,C,D} और C,D के संबंध में {C,D,A}, {C,D,B}, {C,D,A,B}|

अब केंडिडेट-की की हमारी परिभाषा के मुताबिक केवल वे ही की केंडिडेट-की हो सकती हैं, जिनका कोई भी प्रापर सबसेट सुपर सेट नहीं हैं। इसके मुताबिक {A,B} केंडिडेट नहीं हो सकती हैं, क्‍योंकि इसका सबसेट {A} एक सुपर-की हैं। इसी प्रकार {B,C,D} भी केंडिडेट-की नहीं हो सकती हैं, क्‍योंकि इसका सबसेट {C,D} एक सुपर-की हैं। इसी तरह देखें तो केवल {A} और {C,D} ही केंडिडेट की हो सकती हैं।

3. प्रायमरी की (Primary Key)  प्रायमरी की वह शब्‍दावली हैं, जिसका उपयोग उस केडिडेंट की के लिए किया जाता हैं, जिसे डाटाबेस डिजाइनर ने किसी एंटीटी को पहचानने में प्रमुख साधन के रूप में चुना हैं।

4. अल्‍टरनेट की (Alternate Key) : अल्‍टरनेट – की ऐसी शब्‍दावली हैं, जिसका उपयोग ऐसी केंडिडेट की के लिए किया जाता हैं जो डाटाबेस डिजाईनर द्वारा प्रायमरी की चुनने के बाद शेष रह जाती हैं।

5. फॉरेन की (Foreign Key) :- यह शब्‍दावली डाटाबेस के रिलेशन में ऐट्रीब्यूट या एट्रीब्‍यूट सेट के लिए प्रयुक्‍त की जाती हैं, जो उसी डाटाबेस की अन्‍य रिलेशन में प्रायमरी-की का काम करती हैं। उदाहरण के लिए –

Employee (Emp ID, Name, Dept Name, Salary)

Department (Dept Name, Location, Phone No.)

6. कम्‍पोजिंट की (Composite Key) :- एक ऐसी प्रायमरी-की जिसमें एक से अधिक एट्रीब्‍यूट हों, कम्‍पोजिट की कहलाती हैं।




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