SQL

SQL Constraints

SQL Constraints

SQL Constraints :- SQL Constraints का इस्‍तेमाल table के Columns के लिए कुछ rules देने के लिए किया जाता हैं। Constraints को table create करते वक्‍त और table ATER करते वक्‍त दिया जाता हैं।


SQL Constraints या तो Column level हो सकते हैं या table level हो सकते हैं। column level Constraints सिर्फ Single Column पर ही apply होते हैं और table level Constraints पूरे table पर apply होते हैं।

 

Syntax for Creating Constraints :-

Create table  table-name (


Column1 data_type constraint

Column2 data_type constraint

—————————————–

) ;

Types Of Constraints –


1) Not null :- किसी table के column में अगर कोई Value नहीं दी जाती तो by default उस जगह Value Null होती हैं। यदि हम यह चाहते हों कि किसी Value के अभाव में उस जगह Null Set न हों, तो उस Column की हमें Null Constraint देना पड़ेगा।

2) Default :- यदि Column में कोई Value नहीं दी जाती तो default value set हो जाती हैं।

For eg. हम एक table create करते हैं जिसका नाम basic हैं। इसमें field हैं name, id, address, और email। इसे create करने के लिए हम यह command देंगे –

create table basic (name varchar(70), id int(11), not null, address varchar(100), email varchar(50), default ‘No email’);

यहाँ आपने देखा कि हमने जो email field बनाई हैं उसमें default value ‘No email’ दी हैं। इसका मतलब यह हैं कि value insert करते वक्‍त यदि कोई user email नहीं देता तो वहाँ पर email की default value set हो जाएगी।

3) Primary Key :- किसी table में हर record की एक अलग पहचान होती हैं। Primary Key table में किसी record को uniquely identify करने के लिए दी जाती हैं। अगर हम किसी column को primary key बनाते हैं तो उस column की हर value unique होगी। अगर हम Primary key define करते हैं तो not null और unique constraint define करने की जरूरत नहीं पड़ती।

4) Foreign Key :- किसी Table की Foreign Key किसी दूसरी table की primary key होती हैं।

Foreign Key Constraints को दो table के बीच में relation स्‍थापित करने के लिए use करते हैं। किसी table की foreign key किसी दूसरी table की primary key होती हैं। जिस table में foreign key होती हैं वह child table कहलाती हैं तथा जिस table से इसका relation होता हैं (यह table जिसमें यही foreign key एक primary key होती हैं) वह ‘parent table’ कहलाती हैं।

5) Unique :- table के हर एक column की values अलग-अलग होती हैं। unique constraint और primary constraint में मूल difference ये होता हैं कि primary key में कोई भी value null नहीं हो सकती जबकि unique constraint में कोई value null हो सकती हैं।

6) Check :- यह Constraint किसी table के column में स्‍थापित की गई value को limit करने के लिए प्रयोग किया जाता हैं।

7) Index :- तेज गति से data को create और retrieve करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता हैं।

 

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