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How to White Balance Correction in image

How to White Balance Correction in image

व्हाइट बैलेंस कलर कास्ट को हटाने की एक प्रक्रिया है ताकि जो चीजें वास्तव में सफेद दिखती हैं वह फोटो मैं भी सफेद दिखे| कैमरे में सही व्हाइट बैलेंस के लिए लाइट सोर्स के कलर तापमान का ध्यान रखना चाहिए जो सफेद लाइट की गर्माहट एवं ठंडक को रेफर करता है|

कलर तापमान लाइट सोर्स की क्वालिटी मापने का एक तरीका है| यह नीली या लाल लाइट की मात्राओं के अनुपात पर आधारित होता है और हरी लाइट को अनदेखा किया जाता है| इस अनुपात को डिग्री केल्विन मैं मापा जाता है| जिस लाइट का कलर तापमान अधिक होता है वहां नीली लाइट्स अधिक होती है और कम कलर तापमान वाली लाइट के पास कम नीली लाइट होती है| इस तरह से ठंडी लाइट का कलर तापमान अधिक होता है|


मानव मस्तिष्क तेजी से अलग-अलग कलर तापमानों के साथ एडजस्ट हो जाता है| हमारी आंखें एक सफेद कागज को सफेद कागज की तरह ही देखती हैं चाहे उसे तेज रोशनी में देखा जाए या धीमी रोशनी में| दुर्भाग्यवश कलर फिल्में केवल कुछ विशेष रेंज के कलर तापमान में ही रंगों को सही तरह से रिकॉर्ड करती हैं| दूसरी ओर डिजिटल कैमरे में आमतौर से बिल्ट इन सेंसर होते हैं जो करंट कलर तापमान को माप सकते हैं| जब कुछ क्रिएटिव और स्पेशल इफेक्ट्स की जरूरत होती है तो हम कैमरे को निर्देश देते हैं कि हमारी जरूरत को पूरा करने के लिए वह एक निश्चित कलर तापमान का प्रयोग करें| इस तरह जो सफेद रंग हम सीधे देख रहे हैं वह इमेज मैं भी सफेद ही दिखेगा इसे व्हाइट बैलेंस कहा जाता है|

व्हाइट बैलेंस को सही तरह से ठीक करने से इमेज में कलर शिफ्ट हो सकता है| उदाहरण के लिए, कैमरे से कहा गया है कि सूर्य की रोशनी का कलर तापमान प्रयोग करें ताकि एक इंडोर वातावरण की इमेज ली जा सके इस इंडोर कक्ष में धीमी लाइट है| कैमरे को ज्यादा मात्रा में नीली रोशनी और कम मात्रा में लालू रोशनी की जरूरत होगी और यह अपने एल्गोरिदम को इस तरह से सेट करता है कि वह नीली लाइट के प्रति अधिक संवेदनशील हो लेकिन एक वातावरण जिसमें धीमी रोशनी है| कलर तापमान कम होता है और नीली लाइट की अपेक्षा लाल लाइट अधिक होती है परिणाम स्वरुप हम Redishया yellowish इमेज देखते हैं|

दूसरी ओर मान लो हमने कैमरे को कम कलर तापमान पर सेट किया है और फोटो सूर्य की रोशनी में लेते हैं क्योंकि व्हाइट बैलेंस धीमी लाइट पर सेट है| अतः प्रोसेसिंग एल्गोरिदम नीली लाइट की अपेक्षा लाल लाइट के प्रति अधिक सेंसिटिव होती है परिणाम स्वरुप हम नीली रोशनी वाली इमेज देखते हैं|


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