Introduction to DBMS

DBMS (Data Base Management System) एक Software होता हैं, जिसका उपयोग डेटाबेस को बनाने और संभालने के लिए किया जाता हैं। DBMS अपने उपयोगकर्ताओं (users), और प्रोग्रामरों को एक व्‍यवस्थित तरीके के साथ डाटा को बनाने, संभालने और update करने की सुविधा प्रधान करता हैं।

डी बी एम् एस का परिचय (Introduction to DBMS)

DBMS (Data Base Management System) एक Software होता हैं, जिसका उपयोग डेटाबेस को बनाने और संभालने के लिए किया जाता हैं। DBMS अपने उपयोगकर्ताओं (users), और प्रोग्रामरों को एक व्‍यवस्थित तरीके के साथ डाटा को बनाने, संभालने और update करने की सुविधा प्रधान करता हैं।

DBMS के उदाहरण – MySQL, Postgre SQL, Microsoft Access, Oracle etc.

डेटाबेस सिस्टम का इतिहास (History of Database)

1950 के दशक से 1960 के दशक तक

  • Data facts और आंकड़ों का एक collection है। और यह लगातार बढ़ता ही जा रहा था, इसलिए यह जरूरी था, कि इस डेटा को किसी डिवाइस या एक सॉफ्टवेयर में स्टोर किया जाए जो safe हो।
  • 1960 के दशक की शुरुआत में चार्ल्स बैचमैन द्वारा सबसे पहले “Integrated Data Store” सिस्टम को विकसित किया गया। यह नेटवर्क डेटा मॉडल पर आधारित था।
  • 1960 के दशक के अंत में, IBM (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स कॉर्पोरेशन) ने “Integrated Management सिस्टम” को विकसित किया, जो आज कई जगहों पर सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला standard database सिस्टम है।
  • इसमें डेटा को स्टोर करने के लिए मैग्नेटिक टेप विकसित किए गए थे।
  • डेटा को पंच कार्ड पर इनपुट किया जा सकता था, एवं प्रिंटर से आउटपुट कर सकते थे।

1960 और 1970 के दशक के अंत में

  • 1960 के दशक के अंत में हार्ड डिस्क को विकसित किया गया, जिसके उपयोग से डेटा प्रोसेसिंग का तरीका और भी आसान हो गया, क्योंकि हार्ड डिस्क द्वारा डेटा को direct access किया जा सकता था।
  • हार्ड डिस्क के साथ, नेटवर्क और Sequential डेटाबेस बनाए जा सकते हैं जो डेटा को लिस्ट एवं अन्य तरीके से डिस्क पर स्टोर करने की permission देते हैं। प्रोग्रामर द्वारा इन डेटा structures को बनाया जा सकता है और उनको manipulate (हेरफेर) भी की जा सकती है।
  • 1970 के दशक में EF CODD ने रिलेशनल डाटाबेस मॉडल को विकसित किया।

1980 के दशक में

  • Initial commercial relational डेटाबेस सिस्टम जैसे IBM DB2, Oracle, Ingress, और DEC Rdb द्वारा डेटाबेस प्रोसेसिंग की advance तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1980 के दशक की शुरुआत में, रिलेशनल डेटाबेस से भी बेहतर परफॉर्मेंस वाले डेटाबेस सिस्टम को डेवलप किया गया। साथ ही ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड डेटाबेस पर भी work किया गया।

1990 के दशक की शुरुआत में:


  • मुख्य रूप से रिलेशनल डेटाबेस के लिए 1990 के दशक में SQL भाषा को डिज़ाइन किया गया था इसका उपयोग transactions प्रोसेसिंग ऍप्लिकेशन्स के लिए किया जाता है।
  • रिलेशनल डेटाबेस के लिए यह स्टैण्डर्ड भाषा है।

1990 के दशक के अंत में :

NewSQL आधुनिक रिलेशनल डेटाबेस का एक ग्रुप है जिसका उद्देश्य SQL का उपयोग करते हुए और पारंपरिक डेटाबेस सिस्टम की ACID गारंटी को बनाए रखना एवं ऑनलाइन transaction प्रोसेसिंग (रीड-राइट) वर्कलोड के लिए NoSQL सिस्टम के जैसे ही  समान परफॉर्मेंस प्रदान करना है।

डेटाबेस मैनेजमेंट के मुख्‍य घटक (Main components of database management)

  1. सारणी (tables) :- यह रिलेशनल डेटाबेस मॉडल के संबंध में है। जहाँ सभी डेटा को टेबल्‍स के रूप में संग्रहित किया गया है। विभिन्‍न प्रकार के संचालन टेबल्‍स पर किये जाते हैं, जैसे :- डेटा संग्रह, फिल्‍टर करना, पुन: प्राप्‍त करना और संपादन करना। टेबल्‍स रिकॉर्ड (row) और फील्‍ड (Column) के कटाव से बने सेल से मिलकर बनते हैं। यही सेल टेबल्‍स में डेटा को संग्रहित करने के लिए उपयोग की जाती है।
  2. फील्‍ड :- टेबल के प्रत्‍येक Column को फील्‍ड कहते हैं यह डेटा के विशिष्‍ट भाग के लिए आरक्षित एक क्षेत्र होता है। जैसे ग्राहक संख्‍या ग्राहक का नाम, सड़क का पता, शहर, राज्‍य, फोन नं., वर्तमान पता आदि।
  3. रिकॉर्ड :- टेबल्‍स के Record को पंक्ति (Row) या टपल (Tuple) के रूप में भी जाना जाता है और दूसरे शब्‍दों में रिकॉर्ड एक एन्‍ट्री जैसे कि एक व्‍यक्ति, कंपनी संक्रमण आदि से संबंधित सभी क्षेत्रों की डेटा वस्‍तुओं का संग्रह है।
  4. क्‍वेरीज (Queries) :- किसी टेबल या डेटाबेस से जरूरत के अनुसार डेटा निकालने की अनुमति दी जाती है, उसे क्‍वेरी कहते हैं। किसी क्‍वेरी के उत्‍तर में जो रिकॉर्ड डाटाबेस से निकाला जाता है उसे उस क्‍वेरी का डायनासेट कहते हैं। जैसे कि अगर आप अपने शहर में रहने वाले दोस्‍तों की सूची निकालना चाहते हैं तो इसे एक क्‍वेरी कहेगें।
  5. फॉर्म्‍स :- यद्यपि आप टेबल्‍स में डेटा दर्ज और संशोधित कर सकते, लेकिन टेबल्‍स में डेटा का भंडारण करना तथा संशोधन करना आसान नहीं होता है। इस समस्‍या को दूर करने के लिए, फॉर्म्‍स प्रस्‍तुत किए जाते हैं। टेबल्‍स की तरह फार्म में डेटा दर्ज करना पसंद करते हैं।
  6. रिपोर्ट्स :- आसान शब्‍दों में, जब आप डेटाबेस से लाए गये रिकॉर्ड को कागज पर प्रिन्‍ट करना चाहते हैं तो उसे रिपोर्ट कहते हैं।

Characteristics Of DBMS

DBMS की कुछ विशेषताएँ निम्‍नलिखित हैं :-

  1. DBMS की सबसे बड़ी विशेषता यह हैं कि इसमें डेटा रिडंडंसी को Control किया जा सकता है।
  2. DBMS में डेटा को Share कर सकते हैं।
  3. DBMS में सुरक्षा का पूरा ख्‍याल रखा जाता है।
  4. DBMS में प्रोसेसिंग की गति अच्‍छी है।
  5. DBMS की एक और विशेषता यह है कि इसमें डेटा Independent होता है।

डी बी एम् एस के कुछ फायदे (Advantage of using DBMS)

  • डेटा रिड़ंडसी को नियंत्रित करना (Minimize data redundancy) – File based system में प्रत्‍येक एप्लिकेशन प्रोग्राम की अपनी निजी फाइल होती हैं इस स्थिति में, कई स्‍थानों पर एक ही डेटा की डुप्लिकेट file बनाई जाती हैं। DBMS में, एक संगठन के सभी डेटा की एक डेटाबेस फाइल में एकीकृत किया जाता हैं, मतलब कि डेटा डाटाबेस में केवल एक स्‍थान पर दर्ज किया जाता हैं और इसे दोहराया नहीं जाता हैं।
  • डेटा साझा करना – DBMS में Organization के Authorized User द्वारा डेटा साझा किया जा सकता हैं। डाटाबेस Administrator डेटा को नियंत्रित करता हैं और डेटा को Access करने के लिए उपयोगकर्ताओं को अधिकार देता हैं। कई उपयोगकर्ताओं को एक साथ जानकारी के समान टुकड़े तक पहुँचने का अधिकार दिया जा सकता हैं। Remote User भी समान डेटा साझा कर सकते हैं।
  • डाटा स्थिरता – Data Redundancy को नियंत्रित करके डाटा स्थिरता प्राप्‍त की जाती हैं। मतलब कि डाटाबेस में एक ही प्रकार के डेटा को बार-बार इन्‍हें जमा होने से रोका जाता हैं।
  • डेटा का एकीकरण – DBMS में डेटाबेस में डेटा टेबल्‍स में संग्रहित होता हैं। एक डेटाबेस में एक से अधिक टेबल्‍स हो सकते हैं और टेबल्‍स के बीच संबंध बनाए जा सकते हैं। इससे डेटा को पुन: प्राप्‍त करना और अपडेट करना आसान हो जाता हैं।
  • डेटा सिक्योरिटी – DBMS में डाटा को पूरी तरह से Database Administrator द्वारा नियंत्रित किया जाता है और डाटाबेस Administrator ही यह सुनिश्चित करता है कि किस User को कितना Database के कितने हिस्‍से पर Access देना है या नहीं।
  • Recovery Procedures – कम्‍प्‍यूटर एक मशीन है इसलिए संभव है कि कभी भी कम्‍प्‍यूटर में कोई Hardware या Software संबंधित समस्‍या उत्‍पन्‍न हो जाए। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि किसी समस्‍या कम्‍प्‍यूटर में किसी प्रकार की समस्‍या उत्‍पन्‍न होने पर उसमें रखें डेटाबेस को हम Recover कर पाएँ। DBMS में यह काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है।

Data Base System के कुछ संभावित नुकसान भी हैं

  1. Cost Of Implementing :- database system को implement करने में लागत ज्‍यादा आ सकती है जिसमें कॉफी रूपये खर्च हो सकते हैं।
  2. Effort to transfer data :- मौजूदा system से database में data को transfer करने के लिए कॉफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और इसमें बहुत अधिक समय भी लग सकता है।
  3. Risk of database fail :- अगर database विफल हो जाता है भले ही अपेक्षाकृत कम अवधि के लिए तो संपूर्ण कंपनी पर भी असर पड़ेगा और कंपनी को कई प्रकार के नुकसान उठाने पड़ेंगे।

डीबीएमएस शब्दावली (DBMS Terms)

  1. रिलेशन (Relation): रिलेशन एक डाटा युक्त टेबल है जिसमें डाटा को rows या Tuples तथा Columns या Attributes में व्यवस्थित किया जाता है।
  2. टपल (Tuples): टेबल या रिलेशन की rows टपल कहलाती है ।
  3. एट्रीब्यूट (Attributes): टेबल या रिलेशन का कॉलम एट्रीब्यूट कहलाता है।
  4. डिग्री (Degree): किसी टेबल या रिलेशन में एट्रिब्यूट की संख्या उसकी डिग्री कहलाती है।
  5. कार्डिनलीटी (Cardinality): किसी टेबल या रिलेशन में रो या टपल की संख्या उसका कार्डिनलीटी कहलाता है।
  6. व्यू (views): वह टेबल, जिसका स्वयं का अपना कोई डाटा नहीं होता, बल्कि उस टेबल का डाटा दूसरे वेस टेबल से लिए गए होते हैं, views कहलाता है। इस प्रकार views एक आभासी टेबल (Virtual Table) है। views उपयोगकर्ता के लिए किसी सूचना तक सीमित पहुंच (access) प्रदान करने का एक उपयोगी तरीका है।
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