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डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के लाभ तथा हानियाँ

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम क्या हैं? (What is Distributed System)

“जब अनेक Autonomous (स्वतंत्र) कंप्यूटर को जोड़कर एक सिंगल सिस्टम की तरह प्रयोग किया जाता हैं उसे डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम कहते हैं जरुरी नहीं की सारे कंप्यूटर एक ही जगह पर कनेक्ट हो वह अलग अलग जगह पर भी कनेक्ट हो सकते हैं यदि सभी कंप्यूटर एक ही जगह पर कनेक्ट हैं तो इसे LAN Distributed System कहेगें और यदि सभी कंप्यूटर अलग अलग जगह पर कनेक्ट हैं तो इसे WAN Distributed System कहा जायेगा|”

Distributed System  के लिए तीन चीजो की आवश्यकता होती हैं –


  1. Network
  2. Distributed Application
  3. Middle ware Service (Software)

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के लाभ तथा हानियाँ (Advantages and Disadvantages of Distributed System)

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम के लाभ (Advantages of Distributed system)

कीमत (Cost ) –

कम्प्यूटर्स Component के लिये प्रयोग किये हार्डवेयर की Performance के आधार पर कम कीमत होती है।

परफाॅरमेन्स (Performance) –

Combined Processing तथा बहुत सारी Nodes की स्टोर क्षमता के प्रयोग के द्वारा परफाॅरमेन्स लेयर अच्छा होता है। अर्थात प्रोसेस का कलेक्शन Centralized कम्प्यूटर्स की अपेक्षा अच्छी Performance देता है।

भरोसेमन्द (Reliability) –

हार्डवेयर के Fault पर Users इसे परिवर्तित कर सकते है। अर्थात यदि कुछ मशीने Crash हो जाती है, तो System Survive कर सकता है।

डिस्ट्रिब्यूशन (Distribution) –

कुछ Application जैसे E-Mail तथा Web के रूप में प्राकृतिक रूप से डिस्ट्रिब्यूट कियें जाते है।

डाटा/रिसोर्सेस की शेयरिंग –

बहुत सारे Application में डाटा को तैयार करना आवश्यक है। जैसे बैकिंग एरिर्जवेशन सिस्टम आदि ।

डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम की हानियाॅ (Disadvantages of Distributed System)

1. साफ्टवेयर जटिलता (Software Complexity) –

पारम्परिक Software की तुलना में डिस्ट्रिब्यूटेड Software को Develop करना जटिल तथा उलझनपूर्ण होता हैं अतः इसे Develop करना अधिक खर्चीला होता है। तथा इसमें गलंतियों के बहुत सारे Chance होते हें ।

2. नेटवर्क समस्याये (Network Problems) –

Network Infrastructure के द्वारा कई समस्याये उत्पन्न होती है जिसकी वजह से Message की हानि, Overloading इत्यादि होती है।

 

3. सुरक्षा –

Distribute System कई घटकों से मिलकर बना होता है। इन घटकों के मध्य डाटा की शेेयरिंग डाटा सुरक्षा की समस्या को जनरेट करता है।

4. Design Issue of Distributed System – 

इसके प्रमुख Design Issue निम्नलिखित  है, जो विशेष तौर पर Application के Distributed Nature से उत्पन्न होते है-
1. Transparency
2. Communication
3. Performance and Scatability
4. Hetrogeneity
5. Openness
6. Reliability and Fault Tolerance
7. Security

1. Transparency- इसके अंतर्गत निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार किया जाता है-
(a) लोकल  तथा रिमोट संसाधनों को Identical Operations  के प्रयोग के द्वारा एक्सेस किया जाता है।
(b) यूजर्स नहीं बता सकते हैं कि हार्डवेयर तथा साॅफ्टवेयर संसाधनों को कहां पर लोकेट किया गया ये संसाधन CPU Files Database इत्यादि होते है। संसाधन के नाम को संसाधन की लोकेशन को encode नहीं करना चाहिए। (c) संसाधनों को इनके नाम में बदलाव किये बिना एक लोकेशन से दूसरें लोकेशन पर मूव करने से स्वतंत्र होना चाहिए।

2. Communication- डिस्ट्रिब्यूटेड  सिस्टम के घटको केा Interact करने के क्रम में कम्यूनिकेट करना चाहिए। ये दो समअमसे पर सपोर्ट को इंगित करते है।
(a) नेटवर्किंग इनफ्रास्ट्कचर।
(b) उपयुक्त कम्यूनिकेशन Primitives and Modems और उसकेे इम्प्लीमेन्टेशन।

3.Performance and Scalability परफाॅरमेन्स तथा स्केलेबिलिटीज- एक डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम परॅफारमेन्स को निम्नलिखित प्रमुख थ्ंबजवते प्रभावित करते है-
(a) व्यक्तिगत वर्कस्टेंशनों की परफाॅरमेन्स ।
(b) कम्यूनिकेशन Infrastructure की स्पीड ।

4. Hetrogeneity-डिस्ट्रिब्यूटेड एप्लीकेशन्स सामान्यतः निम्नलिखित बिन्दुओ पर heterogeneous होते हैं-
(a) भिन्न-भिन्न  हार्डवेयर- Mainframe, Workstations, PCS, Servers etc.
(b) भिन्न-भिन्न साॅफ्वेयर – Unix, MS Windows IBM OS/2,Real ime OS etc.

5.Openness-डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्ट्म्स का एक महत्वपूर्ण फीचर Openness and Flexibility है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार किया जाता है-
(a) प्रत्येक सर्विस को प्रत्येक क्लाइंट के द्वारा समान रूप से एक्सेस करना चाहिए।
(b)इससे नई सेवाओं को Install and Debug और इम्प्लीमेन्ट करना आसान है।

6. Reliability and Fault Tolerance-डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम को बनाने का मुख्य लाभ विश्वसनीयता का सुधार करना है।

Reliabillity- यदि मशीनेें खराब हो जाती हें तो सिस्टम को परिवर्तित किए गये संसाधनों की संख्या के साथ कार्य करना चाहिए। सिस्टम पर डाटा खोना नहीं चाहिए तथा काॅपियों को विभिन्न सर्वरों पर सही रूप से Store करना चाहिऐं।

7. Security- इनफाॅरमेशन संसाधनों की Security के अन्तर्गत निम्नलिखित बिन्दु आते है-
(a) Unauthorised व्यक्ति की एक्सेस को रोकना।
(b) बदलाव तथा भ्रष्टाचार के विरूद्ध प्रोटेक्शन।

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