अंतर

फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी में अंतर

फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी में अंतर (Difference Between Physical and Logical Topology)

टोपोलॉजी नेटवर्क डिवाइसेस का एक पैटर्न होता है नेटवर्किंग में टोपोलॉजी को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। पहली फिजिकल टोपोलॉजी और दूसरी लॉजिकल टोपोलॉजी| फिजिकल टोपोलॉजी नेटवर्क की वास्तविक भौतिक संरचना को संदर्भित करता है अर्थात फिजिकल टोपोलॉजी नेटवर्क के स्ट्रक्चर को बताता हैं, जबकि एक लॉजिकल टोपोलॉजी उस तरीके को निर्धारित करती है जिसमें डेटा वास्तव में नेटवर्क के माध्यम से एक डिवाइस से अन्य तक पहुंच जाता है |

फिजिकल टोपोलॉजी वह तरीका है जिससे आप फिजिकल रूप से नेटवर्क को मैप की तरह बनाते हैं, और लॉजिकल टोपोलॉजी वह तरीका है जिससे नेटवर्क पर जानकारी प्रवाहित होती है। आमतौर पर, फिजिकल और लॉजिकल टोपोलॉजी समान होती है, लेकिन कभी-कभी वे अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे कि एक फिजिकल स्टार / लॉजिकल रिंग टोपोलॉजी में।

नेटवर्क टोपोलॉजी यह बताता हैं कि विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस को कैसे जोड़ा जा सकता है।



इस पोस्ट में आप जानेंगे-

  1. फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी का तुलना चार्ट
  2. फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी की परिभाषा
  3. फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी में मुख्य अंतर
  4. फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी का निष्कर्ष

फिजिकल टोपोलॉजी और लॉजिकल टोपोलॉजी का तुलना चार्ट

तुलना का आधार
फिजिकल टोपोलॉजी
लॉजिकल टोपोलॉजी
बेसिकफिजिकल टोपोलॉजी नेटवर्क के स्ट्रक्चर को बताता है, यह देखता हैं की नेटवर्क कैसा दिखता है और कैसे कार्य करता है।लॉजिकल टोपोलॉजी डेटा के ट्रांसमिशन के लिए लैन पर डिवाइसेस द्वारा उपयोग किए जाने वाले communication mechanism का वर्णन करता है।
प्रकारबस, स्टार, रिंग और मेष टोपोलॉजी।लॉजिकल बस और लॉजिकल रिंग टोपोलॉजी
स्थापितकेबल और डिवाइसेस के फिजिकल कनेक्शन द्वारा।नेटवर्क में डेटा द्वारा ट्रेवल की गई पाथ के द्वारा|
प्रभावित कर सकते हैंलॉजिकल टोपोलॉजी प्रकृति में अमूर्त है|जबकि फिजिकल टोपोलॉजी को अनुकूलित किया जा सकता है।

फिजिकल टोपोलॉजी (Physical Topology)

फिजिकल टोपोलॉजी से हमारा तात्पर्य यह है की यह डिवाइसेस के भौतिक लेआउट का प्रतिनिधित्व करता है। जैसे की इस नेटवर्क टोपोलॉजी में जुड़े डिवाइसेस, कनेक्टेड कंप्यूटर और केबल आदि। यह नेटवर्क पर डिवाइसेस की व्यवस्था और एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट करने के तरीके को भी संदर्भित करता है।

फिजिकल टोपोलॉजी को नेटवर्क मीडिया के लेआउट के रूप में माना जा सकता है जो नेटवर्क पर डिवाइसेस के इंटर कनेक्शन को दर्शाता है। जो ज्यामितीय आकार से जुड़े डिवाइसेस को एक दूसरे के साथ बनाते हैं|

चुने गए फिजिकल टोपोलॉजी के आधार पर नेटवर्क पर डिवाइसेस के संचार को प्रभावित करने वाले कारक हैं:

  • लागत (Cost)
  • अनुमापकता (Scalability)
  • बैंडविड्थ की क्षमता (Bandwidth capacity)
  • स्थापना करने में आसान (Ease of installation)
  • समस्या निवारण में आसानी (Ease of troubleshooting)

फिजिकल टोपोलॉजी के प्रकार (Types of Physical Topology)

कुछ सामान्य रूप से प्रयुक्त फिजिकल टोपोलॉजी बस, रिंग और स्टार हैं।

  • बस टोपोलॉजी –

बस टोपोलॉजी (Bus Topology) में एक ही तार (Cable) का प्रयोग होता है और सभी कम्प्यूटरो को एक ही तार से एक ही क्रम में जोड़ा जाता है | तार के प्रारम्भ तथा अंत में एक विशेष प्रकार का संयंत्र (Device) लगा होता है जिसे टर्मिनेटर (Terminator) कहते है | इसका कार्य संकेतो (Signals) को नियंत्रण करना होता है |

  • रिंग टोपोलॉजी –

यह टोपोलॉजी एक रिंग बनाकर नेटवर्क के सभी डिवाइसेस को जोड़ती है और डेटा का प्रवाह हमेशा एक ही दिशा में होता हैं। इस टोपोलॉजी में कोई होस्ट, मुख्य या कंट्रोलिंग कम्प्यूटर नही होता हैं, इसमें सभी कम्प्यूटर एक गोलाकार आकृति में लगे होते है प्रत्येक कम्प्यूटर अपने अधीनस्थ (Subordinate)  कम्प्यूटर से जुड़े होते है इसे सर्कुलर (Circular) भी कहा जाता है |रिंग टोपोलॉजी दो प्रकार की होती है – सिंगल रिंग और ड्यूल रिंग।

  • स्टार टोपोलॉजी –

इस टोपोलॉजी में, सभी डिवाइस अपने स्वयं के केबल द्वारा एक केंद्रीय हब से जुड़े होते हैं।

  • मेश टोपोलॉजी –

यह टोपोलॉजी प्रत्येक डिवाइस को नेटवर्क के हर दूसरे डिवाइस के साथ लिंक करती है।

लॉजिकल टोपोलॉजी (Logical Topology)

लॉजिकल टोपोलॉजी के सहायता से नेटवर्क में डेटा को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस पर स्थानांतरित किया जाता है, भले ही डिवाइस के बीच भौतिक रूप से कोई संबंध न हो। उदाहरण के लिए, आईबीएम (IBM) के टोकन रिंग एक लॉजिकल रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) है।

फिजिकल टोपोलॉजी के विपरीत, लॉजिकल टोपोलॉजी उस तरीके पर जोर देती है जिस तरह से डेटा के मार्ग के फिजिकल लेआउट के बजाय नेटवर्क नोड्स के बीच डेटा ट्रांसमिट होता है। इन टोपोलॉजी के बारे में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि फिजिकल और लॉजिकल दोनों प्रकार के टोपोलॉजी एक नेटवर्क के बारे में स्वतंत्र हैं, चाहे वह किसी भी आकार का हो।

लॉजिकल टोपोलॉजी एक सिग्नल पाथ है जो फिजिकल टोपोलॉजी से गुजरता है।

  • लाइन अनुशासन (Line discipline)
  • त्रुटि सूचनाएँ (Error notifications)

लॉजिकल टोपोलॉजी के प्रकार (Types of Logical Topology)

  • लॉजिकल बस –

इस टोपोलॉजी में डेटा सोर्स से सभी गंतव्यों के लिए एक रैखिक पैटर्न (Linear patter) का अनुसरण करता है।

  • लॉजिकल रिंग –

इस टोपोलॉजी में, डेटा एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में रिंग के रूप में यात्रा करता है और सर्कल की शुरुआत तक पहुंचता है।

फिजिकल और लॉजिकल टोपोलॉजी के बीच महत्वपूर्ण अंतर

  1. फिजिकल टोपोलॉजी मूल रूप से नेटवर्क मीडिया का फिजिकल लेआउट है। इसके विपरीत, लॉजिकल टोपोलॉजी का अर्थ है, पूरे नेटवर्क में डेटा कैसे प्रसारित किया जाता है।
  2. फिजिकल टोपोलॉजी, लॉजिकल टोपोलॉजी में एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में डेटा के ट्रांसमिशन में बाधा नहीं बनती हैं|
  3. लॉजिकल टोपोलॉजी प्रकृति में अमूर्त है, जबकि फिजिकल टोपोलॉजी को अनुकूलित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

नेटवर्क टोपोलॉजी नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह कुशलतापूर्वक नेटवर्क बिछाने का आधार है। फिजिकल और लॉजिकल दोनों टोपोलॉजी एक नेटवर्क को डिजाइन करने और लागू करने के लिए समान महत्व रखती हैं।

सिलेबस के अनुसार नोट्स
DCA, PGDCA, O Level, ADCA, RSCIT, Data Entry Operator
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