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What is Color?

What is Color?

Electromagnetic Spectrum में संकीर्ण बैंड के भीतर प्रकाश तरंगों की frequency को ही color कहा जाता है जिसके प्रति मानव दृष्टि प्रतिक्रिया देते हैं| अन्य शब्दों में, color एक संवेदन है जो अलग-अलग frequency के प्रकाश द्वारा हमारी आंखों पर उत्पन्न होता है| उच्च frequency से दृश्य Spectrum में नीले color की ओर के color उत्पन्न होते हैं जबकि निम्न frequency से लाल color की ओर के color उत्पन्न होते हैं| सफेद प्रकाश Spectrum के सभी रंगों का सम्मिश्रण होता है|

दृश्य प्रकाश Electromagnetic radiation या Radiant energy का एक रूप होता है जैसे की रेडियो frequencyज या x- रेंज होती है Radiant energy Spectrum में ऑडियो frequencyज, रेडियो frequency, x-rays, गामा रेंज, इंफ्रारेड, विजिबल लाइट, अल्ट्रावायलेट लाइट शामिल होते हैं| Radiant energy को frequency या wave length में मापा जाता है इन दोनों में संबंध इस प्रकार दर्शाया जाता है|


wave length = C (light velocity) / f (Radiation Frequency)

Wave length जो मीटर में होती है, C लाइट की गति है जो मीटर प्रति सेकंड में होती है, और f Radiation Frequency है, जो hertz में होती है| Spectrum में Radiant energy की पोजीशन आमतौर पर frequency  के रूप में व्यक्त की जाती है| Wave length का प्रयोग भी मापने की इकाई के रूप में हो सकता है|

जब हम ‘लाइट’ महसूस करते हैं या अलग अलग रंगों को अनुभव करते हैं तो यह मानते हैं कि यह Electromagnetic Spectrum में एक संकीर्ण frequency बैंड है इसी Spectrum के भीतर कुछ अन्य frequency band, Radio waves (तरंगें), microwave infrared waves और X range कहलाते हैं|


दृश्य बैंड के भीतर प्रत्येक frequency वैल्यू एक विशेष color को दर्शाती है| सबसे न्यूनतम frequency वाले सिरे पर लाल color होता है (4.3×1014 hertz) और सबसे उच्चतम frequency वाले सिरे पर बैगनी color होता है (7.5×1014 hertz) | बाकी के Spectrum color लाल से लेकर नारंगी और पीला निम्न सिरे पर एवं हरा, आसमानी, नीला एवं बैगनी उच्च सिरे तक जाते हैं|

जब सफेद प्रकाश की एक पतली करण को 1 प्रिज्म में से होकर निकाला जाता है तब यह प्रकाश विकसित होता है| जिससे प्रतिफलन (reflection) के कारण रंगों का एक Spectrum उत्पन्न होता है इस उत्पन्न हुए रंगों के Spectrum में बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल color होते हैं| एक सफेद वस्तु सफेद इसलिए देखती है क्योंकि जब हम इसे सफेद लाइन में देखते हैं तो यह लगभग पूरे दृश्य Radiation को Replaced कर देती है और इसमें से कुछ भी अवशोषित नहीं करती है लेकिन दूसरी तरफ एक काली सतह सभी दृश्य Radiation को अवशोषित कर लेती है और व्यवहारिक रूप से इसमें से कुछ भी Replaced नहीं होता है|

अलग-अलग color तीन मुख्य रंगों लाल, हरे और नीले को मिलाकर ही बनाए जाते हैं|

चूँकि आंख के संग्राहक लाल, हरे एवं नीले प्रकाश के लिए ही संवेदनशील होते हैं, अतः इन तीनों रंगों के संयोजनों को ऊपर – नीचे करके आंख एवं मस्तिष्क बीच के रंगों को अलग-अलग रूप से समझ लेते हैं| यद्यपि आंख लाल, हरे एवं नीले रंगों के आधार पर ही बाकी रंगों को महसूस करती है, लेकिन वास्तव में रंगों को बनाने के दो मूल तरीके है| यह है Additive color एवं Subtractive color

Additive color

Additive color तरीके में 3 प्राइमरी रंगों लाल, हरे एवं नीले के रंगीन लाइन स्त्रोतों को संयोजित करके एक नया color बनाया जाता है| यह तरीका TV या कंप्यूटर मॉनिटर के लिए प्रयोग किया जाता है जिसे RGB कहते हैं|

Subtractive color

Subtractive color तरीके में रंगीन माध्यमों जैसे पेंट्स या ink जो लाइट के रंगीन Spectrum के कुछ भाग को अवशोषित करते हैं और बाकी को वापस आंख की ओर Replaced करके भेज देते हैं को संयोजित करके रंगों को बनाया जाता है| Subtractive color तरीके का प्रयोग प्रिंटिंग में रंगों को बनाने के लिए होता है|


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