वायरस क्या हैं सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

वायरस क्या है? (What is Virus?)

VIRUS का पूरा नाम Vital Information Resources Under Siege है। वायरस कम्प्यूटर में छोटे- छोटे प्रोग्राम होते है। जो कम्प्यूटर में प्रवेश करके कम्प्यूटर की कार्य प्रणाली को प्रभावित करते है, वायरस कहलाते है। सरल शब्दों में कंप्यूटर वायरस एक हानिकारक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर के डेटा को बुरी तरह से नष्ट (destroy) कर देता है।

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जब एक बार virus कंप्यूटर में आ जाता है तो यह अपने आप ही पूरे कंप्यूटर में फैल जाता है और कंप्यूटर में मौजूद सारें programs को corrupt कर देता है। Virus का काम कंप्यूटर के data को चुराना, डेटा को नुकसान पहुंचाना और डेटा को modify करना होता है। वायरस के पास अपनी खुद की copy को उत्पन्न करने की क्षमता होती है जिसके कारण यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से फैल जाता है।

वायरस एक द्वेषपूर्ण प्रोग्राम है जो कंप्यूटर के डाटा को क्षतिग्रस्त करता है। यह कंप्यूटर डाटा मिटाने या उसे खराब करने का कार्य करता है। वायरस जानबूझकर लिखा गया प्रोग्राम है। यह कंप्यूटर के बूट से अपने आप को जोड़ लेता है और कंप्यूटर जितनी बार बूट करता है वायरस उतना ही अधिक फैलता है। वायरस हार्ड डिस्क के बूट सेक्टर में प्रवेश कर के हार्ड डिस्क की गति को धीमा कर देता है प्रोग्राम चलने से भी रोक सकता है। कई वायरस काफी समय पश्चात भी डाटा और प्रोग्राम को नुकसान पंहुचा सकते हैं। किसी भी प्रोग्राम से जुड़ा वायरस तब तक सक्रीय नहीं होता जब तक प्रोग्राम को चलाया न जाय। वायरस जब सक्रीय होता है तो कंप्यूटर मेमोरी में अपने आप को जोड़ लेता है और फैलने लगता है|

वायरस और वर्म्स में अंतर 

कंप्यूटर वायरस के लक्षण

प्रोग्राम वायरस प्रोग्राम फ़ाइल को प्रभावित करता है। बूट वायरस बूट रिकॉर्ड, पार्टीशन और एलोकेशन टेबल को प्रभावित करता है। कंप्यूटर में वायरस फैलने के कई कारण हो सकते हैं। संक्रमित फ्लापी डिस्क , संक्रमित सीडी या संक्रमित पेन ड्राइव आदि वायरस फ़ैलाने में सहायक हैं। ई-मेल , गेम , इंटरनेट फाइलों द्वारा भी वायरस कंप्यूटर में फ़ैल सकता है। वायरस को पहचानना बहुत मुश्किल नहीं है। वायरस इन्फेक्शन के गंभीर रूप लेने से पहले कम्प्यूटर में उनके संकेत दिखाई देते हैं जो निम्नलिखित हैं-

जब कंप्यूटर धीमा हो

कम्प्यूटर बहुत धीमा हो गया है और किसी भी सॉफ्टवेयर को खोलने में ज्यादा समय ले रहा है, तो इसका मतलब है कि उसकी मेमोरी और सीपीयू का एक बड़ा हिस्सा वायरस या स्पाईवेयर की प्रोसेसिंग में व्यस्त है। ऐसे में कंप्यूटर शुरू होने और इंटरनेट एक्सप्लोरर पर वेब पेज खुलने में देर लगती है।

ब्राउजर सेटिंग्स में बदलाव

आपके ब्राउजर का होमपेज अपने आप बदल गया है, तो बहुत संभव है कि आपके कम्प्यूटर में किसी स्पाईवेयर का हमला हो चुका है। होमपेज उस वेबसाइट या वेब पेज को कहते हैं, जो इंटरनेट ब्राउजर को चालू करने पर अपने आप खुल जाता है।


आमतौर पर हम टूल्स मेन्यू में जाकर अपना होमपेज सेट करते हैं, जो अमूमन आपकी पसंदीदा वेबसाइट, सर्च इंजन या ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सविर्स जैसे ई-मेल आदि होता है। पीसी में घुसा स्पाईवेयर आपको किसी खास वेबसाइट पर ले जाने के लिए इसे बदल देता है।

कंप्यूटर का हेंग होना

जब कम्प्यूटर बार-बार जाम या अचानक हेंग होने लगा है, तो समझ जाएं कि यह इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। खासकर तब, जब आपने कम्प्यूटर में कोई नया सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर इंस्टॉल न किया हो।

पॉप अप विंडोज

इंटरनेट ब्राउजर को चालू करते ही उसमें एक के बाद एक कई तरह की पॉप अप विंडोज खुलने लगती हैं, तो हो सकता है कि इनमें से कुछ में किसी खास चीज या वेबसाइट का विज्ञापन किया गया हो या फिर वे अश्लील वेबसाइट्स के लिंक्स से भरी पड़ी हों।

जब अजीब से आइकन बनने लगें

आपके डेस्कटॉप या सिस्टम ट्रे में अजीब किस्म के आइकन आ गए हों, जबकि आपने ऐसा कोई सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल नहीं किया है। क्लिक करने पर वे तेजी से अश्लील वेबसाइट्स को खोलना शुरू कर देते हैं।

अनजाने फोल्डर और फाइलें

आपके कम्प्यूटर की किसी ड्राइव या डेस्कटॉप पर कुछ ऐसे फोल्डर दिखाई देते हैं जिन्हें आपने नहीं बनाया। उनके अंदर कुछ ऐसी फाइलें भी हैं, जिन्हें न तो आपने बनाया और न ही वे किसी सॉफ्टवेयर के इंस्टॉलेशन से बनीं। इसके अलावा उन्हें डिलीट करने के बाद भी वे कुछ समय बाद फिर से आ जाती हैं।

अनचाहा प्रोग्राम

जब यूजर अपने कंप्यूटर को open करता है तो कुछ प्रोग्राम अपने-आप open हो जाते है जिन्हे Unwanted program (अनचाहा प्रोग्राम) कहते है। यह भी वायरस के कारण होता है|


कैसे जांचें की आपका सिस्टम हैक हो गया हैं?

वायरस का इतिहास (History of Virus)

वायरस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कैलिफोर्निया विश्वविधालय के एक विधार्थी फ्रेड कोहेन (Fred Cohen) ने अपने शोध पत्र में किया था | उस विधार्थी ने अपने शोधपत्र में यह दर्शाया था की कैसे कम्प्यूटर प्रोग्राम लिखा जाये जो कम्प्यूटर में घुसकर उस की प्रणाली पर आक्रमण करे, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार वायरस हमारे शारीर में घुसकर इसे सक्रमित करता है| सर्वप्रथम कम्प्यूटर वायरस को ढूँढना अत्यंत ही कठिन था| इसके बारे में लोगो को 1980 के दशक तक पता नही था तथा लोग इस बात को भी अस्वीकार करते थे कि इस तरह का कोई प्रोग्राम होता है जो कम्प्यूटर को बाधा पहूँचा सकता हैं |

आधुनिक वायरस में C Brain नाम का पहला वायरस माना जाता है जो पूरे विश्व में बड़े स्तर पर फैला था | इस वायरस को एक समाचार का रूप मिला था क्योकि इस वायरस में वायरस बनाने वाले का नाम, पता तथा इसका विशेषाधिकार वर्ष (1986) मौजूद था | उस प्रोग्राम में दो पाकिस्तानी भाइयो बासित तथा अमजद का नाम उनके कम्पनी का नाम तथा पूर्ण पता उपलब्ध था| उस समय वायरस बिल्कुल नया था अत: लोगो ने इसके बारे में बहुत गंभीरता से नही सोचा |

सन 1988 के प्रारम्भ में मैकिन्टोश शांति वायरस उभरा | यह वायरस एक पत्रिका मैकमैग (MacMag) के प्रकाशक रिचर्ड ब्रेनड्रा (Richard Brando) की ओर से था | इस वायरस को मैकिन्टोश आपरेटिंग सिस्टम को बाधित करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था तथा 2 मार्च 1988 को निम्नलिखित सन्देश स्क्रीन पर आया –

“रिचर्ड ब्रेनडा, मैकमैग के प्रकाशक तथा इसके कर्मचारी दुनिया के लिए समस्त मैकिन्टोश प्रयोक्ताओ को विश्व शांति का सन्देश देना चाहते है|”

वायरस दिन प्रतिदिन समय के अनुसार आते गए तथा इससे बचने के लिए प्रयोक्ता ने इस समस्या का हल भी ढूँढना शुरू किया और तब वायरस विरोधी सॉफ्टवेयर का अविष्कार हुआ जो आज अपने आप में एक सम्पूर्ण उधोग है | परन्तु जैसे जैसे वायरस विरोधी सॉफ्टवेयर बनते गए, उसी गति से नये-नये वायरस भी बनाये जाने लगे | जब वायरस विरोधी सॉफ्टवेयर उधोग ने समझ लिया की अब उन्होंने इस पर नियंत्रण कर लिया है तभी मैक्रो वायरस का उदय हुआ | सामान्य वायरस क्रियान्वित योग्य फ़ाइलो तथा सिस्टम क्षेत्र को संक्रमित करते थे जबकि मैक्रो वायरस ने मइक्रो साफ्टवेयर वर्ड के फ़ाइलो को संक्रमिक करना शुरू किया |

इसके बाद कई वायरस का निमार्ण किया गया । जो अलग अलग प्रकार से कार्य करते है।

वायरस के लक्षण :-

  • कम्पुटर में उपयोगी सूचनाये नष्ट होना |
  • डायरेक्ट्री में बदलाव करना |
  • हार्ड डिस्क व फ्लापी डिस्क को फार्मेट करना |
  • कम्प्यूटर की गति को कम करना |
  • की-बोर्ड की कुंजियो का कार्य बदल देना |
  • प्रोग्राम तथा अन्य फइलो का डाटा बदल देना |
  • फइलो को क्रियान्वित होने से रोक देना |
  • स्क्रीन पर बेकार की सूचना देना |
  • बूट सेक्टर में प्रविष्ट होकर कम्प्यूटर को कार्य न करने देना |
  • फइलो के आकार को परिवर्तित कर देना |

कम्प्यूटर वायरस के प्रकार (Types of Computer Virus)

बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus) – इस प्रकार के वायरस फ्लापी तथा हार्डडिस्क के बूट सेक्टर में संगृहीत होते है| जब कम्प्यूटर को प्रारम्भ करते है तब यह आपरेटिंग सिस्टम को लोड होने में बाधा डालते है और यदि किसी तरह आपरेटिंग सिस्टम कार्य करने लगता है तब यह कम्प्यूटर के दुसरे संयंत्रो को बाधित करने लगते है|

पार्टीशन टेबल वायरस (Partition Table Virus)

इस प्रकार के वायरस हार्ड डिस्क के विभाजन तालिका को नुकसान पहुचाते है| इनसे कम्प्यूटर के डाटा को कोई डर नही होता| यह हार्डडिस्क के मास्टर बूट रिकार्ड को प्रभावित करता है तथा निम्नलिखित परिणाम होते है|

  • यह मास्टर बूट रिकार्ड के उच्च प्राथमिकता वाले स्थान पर अपने आप को क्रियान्वित करते है|
  • यह रैम की क्षमता को कम कर देते है|
  • यह डिस्क के इनपुट/आउटपुट नियंत्रक प्रोग्राम में त्रुटी उत्पन्न करते है|

फ़ाइल वायरस (File Virus)

यह वायरस कंप्यूटर की Files को नुकसान पहुचता है यह .exe फ़ाइल को नुक्सान पहुचता हैं इन्हें फाइल वायरस कहा जाता हैं|

गुप्त वायरस (Stealth Virus)

गुप्त वायरस अपने नाम के अनुसार कम्प्यूटर में User से अपनी पहचान छिपाने का हर संभव प्रयास करते है| इन्हें गुप्त वायरस कहा जाता हैं|

पॉलिमार्फिक वायरस (Polymorphic Virus)

यह वायरस अपने आप को बार – बार बदलने की क्षमता रखता है ताकि प्रत्येक संक्रमण वास्तविक संक्रमण से बिल्कुल अलग दिखे | ऐसे वायरस को रोकना अत्यंत कठिन होता है क्योकि प्रत्येक बार ये बिल्कुल अलग होता है |

मैक्रो वायरस (Macro Virus)

मैक्रो वायरस विशेष रूप से कुछ विशेष प्रकार के फ़ाइल जैसे डाक्यूमेंट, स्प्रेडशीट इत्यादि को क्षतिग्रस्त करने के लिए होते है | ये वायरस केवल Microsoft Office की फाइलों को नुकसान पहुचांता हैं|

ओवरराईट वायरस (Overwrite Virus)

यह कंप्यूटर का सबसे सरल वायरस है। यह एक प्रकार का malicious program है जो कंप्यूटर में मौजूद original program code को delete कर देता है। इस वायरस को किसी विशेष file और application को delete करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रैबिट वायरस (Rabbit Virus)

Rabbit Virus को fork bomb के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर की speed को slow (धीमा) कर देता है।

अपेण्ड वायरस (Append Virus)

APPEND virus एक ऐसा वायरस होता है जो file के अंत में अपने हानिकारक code को डाल देता है। दुसरे वायरस की तुलना में Append Virus का पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि यह वायरस कंप्यूटर के किसी भी हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचाता, जिसके चलते यूजर इस बात का पता नहीं लगा पाता की यह वायरस उसके कंप्यूटर में मौजूद है।

रेजिडेंट वायरस (Resident Virus)

यह एक प्रकार का वायरस है जो कंप्यूटर की primary memory में मौजूद होता है जिसे हम RAM भी कहते है। जब कोई यूजर कंप्यूटर को open करता है तो यह वायरस Active हो जाता है और कंप्यूटर में चल रही फाइलों को corrupt कर देता है। Resident virus किसी भी कंप्यूटर के लिए Harmful (नुकसानदायक) होते है क्योकि यह पुरे कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते है।

मल्टीपैरटाइट वायरस (Multipartite Virus)

यह वायरस कई प्रकार से कंप्यूटर में मौजूद फाइलों को Infect (संक्रमित) करता है। यह बूट सेक्टर और हार्ड ड्राइव पर executable फाइलो को नुकसान पहुंचाता है। Multipartite Virus काफी तेज गति से computer में फैलता है।

कंप्यूटर वोर्म (Computer worm)

Computer worm एक प्रकार का वायरस है लेकिन तकनीकी रूप से वायरस से अलग है। वायरस की तरह computer worm भी कंप्यूटर में फ़ैल सकता है। इस वायरस को सिस्टम में फैलने के लिए किसी भी प्रकार के प्रोग्राम की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह automatic (अपने-आप ही) कंप्यूटर में फैलकर फाइलों को नुकसान पंहुचा सकता है। Computer worm नेटवर्क के द्वारा कंप्यूटर में फैलता है।

ट्रोजन हॉर्स (Trojan Horse)

यह एक प्रकार का Malware है। जब कोई यूजर कंप्यूटर में किसी नए प्रोग्राम को install करता है तब यह वायरस कंप्यूटर में प्रवेश (Enter) कर जाता है। यह वायरस कंप्यूटर को unauthorized access प्रदान करता है। Trojan Horse सिस्टम में मौजूद फाइलों को delete कर सकता है।

कैविटी वायरस (Cavity virus)

कैविटी वायरस को Spacefiller virus के नाम से भी जाना जाता है। यह वायरस फाइल के खाली हिस्से में मौजूद होता है और इस वायरस को पहचानना यूजर के लिए काफी मुश्किल होता है।

एन्क्रिप्टेड वायरस (Encrypted Virus)

एन्क्रिप्टेड वायरस hard drive में मौजूद डेटा और फाइलों को Encrypt करता है। Encrypted Virus दो प्रकार के होते है पहला encrypted virus body और दूसरा decryptor |

एक्सीक्यूटेबल वायरस (Executable Virus)

यह non-resident कंप्यूटर वायरस है जो executable फाइलों में मौजूद होता है। जब infected फाइलों को execute किया जाता है तब यह वायरस Active हो जाता है।

कंप्यूटर वायरस फैलता कैसे है?

वायरस फैलने के कई कारण हो सकते है | इसके संक्रमण के मुख्य कारण इस प्रकार है–

  1. चोरी किये गये सॉफ्टवेयर से (Using A pirated Software)
  2. नेटवर्क प्रणाली से (Through Network System)
  3. दुसरे संग्रह के माध्यम से (Through Secondary Storage Device)
  4. इन्टरनेट से (Through Internet)

चोरी की गई सॉफ्टवेयर से (Using A Pirated Software)

जब कोई सॉफ्टवेयर गैर कानूनी ढंग से प्राप्त किया गया हो, तो इसे चोरी किये गये साफ्टवेयर कहते है|

नेटवर्क प्रणाली से (Through Network System)

आज कल सभी कंप्यूटर्स को एक दूसरे से जोड के रखा जाता है और कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े होने के कारण डाटा को आसानी से हस्तांतरित किया जा सकता है तब यह पूरे नेटवर्क पर वायरस के संक्रमण का कारण बनता है|

द्वितीयक संग्रह के माध्यम से (Through Secondary Storage Device)

जब कोई डाटा द्वितीयक संग्रह के माध्यम से स्थानांतरित या कॉपी किया जाता है तो उसका वायरस भी उसमे स्थानांतरित हो जाता है तथा यह संक्रमण (Virus) का कारण बनता है|

इन्टरनेट से (Through Internet)

आज इन्टरनेट को वायरस संक्रमण का मुख्य वाहक माना जाता है आज सारी दुनिया इन्टरनेट से जुडी हुई है और सूचनाओ का आदान प्रदान भी अधिक होता है | आज सबसे ज्यादा वायरस फैलने का कारण इन्टरनेट ही हैं|

कुछ प्रसिद्ध कंप्यूटर वायरस (A few prominent computer Viruses)

आज हमारा कम्प्यूटर कई तरह के वायरसो से ग्रस्त होता है| आये दिन नये – नये वायरस का विकास होता रहता है| इन्टरनेट के अविष्कार ने वायरसों के प्रसार को एक नया आयाम दिया है| न जाने कितने तरह के वायरस आज नेट के माध्यम से कंप्यूटरो को संक्रमित कर रहे है| कुछ प्रसिद्ध वायरस जिन्होंने पिछले दिनों में कंप्यूटरो को बड़े पैमाने पर संक्रमित किया है|

  • माईकलएन्जिलो (Michelangelo)
  • डिस्क वाशर (Disk Washer)
  • सी ब्रेन (C-Brain)
  • मैकमैग (MacMag)
  • जेरुसलेम (Jerusalem)
  • कोलम्बस (Columbus)

माईकलएन्जिलो (Michelangelo) –

अभी तक का सबसे अधिक कुख्यात वायरस माईकल एन्जिलो का नाम ऐसा इसलिए पड़ा क्योकि यह वायरस 6 मार्च, जो माईकलएन्जिलो की जन्म तिथि है, इस दिन यह डाटा को समाप्त कर देता था| इसलिए इसे “6 मार्च का वायरस” भी कहा जाता है| इस वायरस का पता 1991 के मध्य में लगाया गया था तथा इसके बाद के सभी वायरस निरोधक सॉफ्टवेयर (Anti virus software) इसे समाप्त करने में सक्षम थे| इस वायरस के कुख्यात होने के पीछे यह भी कारण था की बहुत सारे एंटी वायरस शोधकर्ताओ ने 6 मार्च को कम्प्यूटर प्रणाली के व्यापक सर्वनाश की भविष्यवाणी की थी| इस भविष्यवाणी का डर लोगो के दिल में 1990 के पूरे दशक तक प्रत्येक 6 मार्च को रहता था जो बहुत बाद में समाप्त हुआ|

डिस्क वाशर (Disk Washer) –

डिस्क वाशर वायरस का नाम इसके अन्दर समाहित सन्देश “Disk Washer with Love” के कारण पड़ा | जिसका पता भारत में 1993 के आखिरी महीनो में लगाया गया| यह वायरस इतना खतरनाक था की यह हार्डडिस्क में उपलब्ध सभी डाटा को समाप्त कर देता था| 1994 तथा इसके बाद तैयार किये जाने वाले एंटीवायरस साफ्टवेयर इस वायरस का पता लगाने तथा इसे समाप्त करने में सक्षम थे|

सी-ब्रेन (C-Brain) –

अमजद तथा बासित दो पाकिस्तानी भाइयो ने इस वायरस को जनवरी 1986 में विकसित किया था| वायरस पर उन दोनों भाइयो का ही पता था जो सही था इसका उद्देश्य लोगो को अवैध ढंग से साफ्टवेयर खरीददारी के लिए हतोत्साहित करना था इसे दुनिया का संभवतः सबसे पहला वायरस माना जाता है| साथ ही अबतक के सभी वायरसों में यह सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला वायरस था| जिसने लाखो कंप्यूटरो को संक्रमित किया था| यह बूट सेक्टर वायरस था|

मैकमैग (Macmag) –

यह वायरस आपके मानिटर पर शांति सन्देश देकर समाप्त हो जाता था| यह केवल एपल मैकिन्टाश कम्प्यूटरो को ही संक्रमित करता था| रिचर्ड ब्रांडो को इस वायरस का जन्मदाता समझा जाता है| रिचर्ड मैकमैग पत्रिका के प्रकाशक थे तथा वायरस का नाम इस पत्रिका पर ही पड़ा| इस वायरस ने बहुत बड़ा नुकसान तो नही किया |

जेरुसलेम (Jerusalem) –

यह वायरस पहली बार हेवरेयु विश्वविध्यालय, जेरुसलेम में लगभग 1987 में पाया गया था| इसलिए इसका नाम जेरुसलेम पड़ा| इसकी एक खास बात यह थी की यह केवल शुक्रवार को ही सक्रिय होता था| यह वायरस बहुत खतरनाक था| यह वायरस शुक्रवार के दिन जिन – जिन फाइलो पर काम किया जाता था उन सभी फाइलो को नष्ट करता था|

कोलम्बस (Columbus) –

कोलम्बस वायरस को डेटाक्राइम तथा 13 अक्टूबर के नाम से भी जाना जाता है| इसका नामांकरण 13 अक्टूबर इसलिए हुआ था की यह पूरे विश्व के सक्रमित कंप्यूटरो पर 13 अक्टूबर 1989 को ही सक्रीय हुआ था| यह भी जेरुसलेम की तरह ही यह क्रियान्वयन योग्य फाइलों को संक्रमित कर हार्डडिस्क के डेटा को नष्ट करता था|

कंप्यूटर वायरस को कैसे रोकें?

  • कंप्यूटर को वायरस से बचाने के लिए हमे कंप्यूटर को लगातार update करना होगा। क्योकि जब कंप्यूटर update होता है तो उसमे नए Feature Add हो जाते है जो सिस्टम को वायरस से सुरक्षित करते है।
  • कंप्यूटर में Antivirus का प्रयोग करे। क्योकि Antivirus कंप्यूटर में मौजूद वायरस को scan करके उसे delete कर देता है।
  • यदि यूजर कंप्यूटर में डेटा और फाइलों को secure (सुरक्षित) करने के लिए कमजोर password का इस्तेमाल करता है तो वायरस आसानी से डेटा को चुरा सकता है और फ़ैल सकता है। इसलिए यूजर को हमेशा strong password का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • कंप्यूटर में Firewall का इस्तेमाल करे। यह भी एक प्रकार का Antivirus है जो Malware जैसे वायरस से कंप्यूटर को protect करता है। दुसरे Antivirus की तुलना में फ़ायरवॉल बेहतर तरीके से कंप्यूटर को वायरस से protect करते है।
  • कंप्यूटर को वायरस से protect करने के लिए Popup Blocker का इस्तेमाल करना चाहिए। जब यूजर किसी browser को browse कर रहा होता है तो उस समय कंप्यूटर में वायरस के प्रवेश होने के chances ज्यादा होते है इसलिए यूजर popup Blocker का इस्तेमाल करता है जिससे वायरस कंप्यूटर में प्रवेश नहीं हो पाता।

एंटीवायरस

हमारे कंप्यूटर में वायरस को खोजकर उसे नष्ट करने के लिए बनाये गए प्रोग्राम को एंटीवायरस (ANTI VIRUS) कहा जाता है। एंटी वायरस एक प्रोग्राम है जो की हमारे कंप्यूटर में वायरस को खोजता है और उन्हें नष्ट करता है। कंप्यूटर के लिए एंटी वायरस बहुत जरुरी होता है। एंटीवायरस किसी वायरस के सक्रीय होने पर आपको सूचित करता है। एंटी वायरस के द्वारा समय समय पर कंप्यूटर को स्कैन भी किया जा सकता है। आज के समय में कई एंटीवायरस बाजार में और इंटरनेट पर उपलब्ध है। कुछ मुख्य एंटीवायरस इस प्रकार हैं-

नॉर्टन (NORTAN) , अवीरा (AVIRA), मकैफ़ी (Mcafee) , अवास्ट (AVAST) आदि।

इनका ऑटो प्रोडक्ट इस्तेमाल से पहले प्रोग्राम और ईमेल का जाँच करके उसे वायरस मुक्त बनाता है। यदि आपके कंप्यूटर में कोई वायरस सक्रीय हो रहा है या हो गया है तो आपको ये सूचित करता है। अब बात आती है की एंटीवायरस के प्रयोग द्वारा कंप्यूटर को कैसे सुरक्षित रखा जाय-

  1. अपने कंप्यूटर को वायरस मुक्त रखने के लिए समय समय पर एंटी वायरस द्वारा स्कैन किया जाना चाहिए।
  2. जब भी आप अपने कंप्यूटर में अलग से मेमोरी लगाएं तो उसे एंटीवायरस द्वारा जरूर स्कैन करें।
  3. कंप्यूटर में सीडी लगाते समय ये देख ले की सीडी पर कोई स्क्रेच तो नहीं है। सीडी लगाने के बाद उसे स्कैन जरूर करें।
  4. अगर आपको एंटीवायरस द्वारा स्कैन करने पर कोई वायरस मिलता है तो उसे नस्ट कर दे।
  5. गेम को कंप्यूटर में रन करने से पहले स्कैन जरूर कर लें।
  6. आप कभी भी फ्री एंटीवायरस का प्रयोग अपने कंप्यूटर में न करें। कुछ एंटीवायरस आपको फ्री ट्रॉयल देती है कुछ समय यूज़ करने के लिए आप उसका प्रयोग करके देख सकते हैं की आपके कंप्यूटर में कौन सा एंटीवायरस सही काम कर रहा है।
  7. जो एंटीवायरस आपके कंप्यूटर में सही काम करे उसे ही अपने कंप्यूटर में रखें।
  8. एंटीवायरस को समय-समय पर अपडेट जरूर करें।
  9. आप अपने कंप्यूटर के लिए अच्छा एंटीवायरस ही खरीदें मुफ़्त एंटीवायरस पर ध्यान न दे।
  10. एक बार में एक ही एंटीवायरस रखेँ अपने कंप्यूटर पर इससे आपके कंप्यूटर की स्पीड अच्छी रहेगी।

इस पोस्ट से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर

कंप्यूटर वायरस का जनक कौन है?

पहला कंप्यूटर वायरस, जिसे ‘क्रीपर वायरस’ कहा जाता है, 1971 में कंप्यूटर इंजीनियर रॉबर्ट थॉमस द्वारा बनाया गया था।

कंप्यूटर में वायरस कैसे आता है?

ये वायरस आमतौर पर इंटरनेट से डाउनलोड किए गए फ़ाइलों, ईमेल अटैचमेंट, प्रोग्राम इंस्टॉलर और ऑडियो या वीडियो फ़ाइलों के माध्यम से फैलाए जाते हैं। वायरस एक प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर के सिस्टम मेमोरी में लोड होते हैं और उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

पहला कंप्यूटर वायरस का नाम क्या है?

दुनिया का पहला कंप्यूटर वायरस The Creeper Program है, जिसे Bob Thomas ने 1971 में लिखा था| कंप्यूटर के भाषा में कोई भी क्रिएशन कोडिंग से होता है| इस वायरस को Bob ने BBN में काम करते हुए लिखा था, जो अब Raytheon BBN Technologies के नाम से जानी जाती है|

लोग कंप्यूटर वायरस क्यों बनाते हैं?

लोग विभिन्न कारणों से कंप्यूटर वायरस बनाते हैं: कुछ इसे मनोरंजन के लिए या एक चुनौती के रूप में करते हैं; अन्य लोग व्यक्तिगत जानकारी चुराकर या मैलवेयर बेचकर वित्तीय लाभ के लिए ऐसा करते हैं; और कुछ लोग साइबर युद्ध के रूप में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए वायरस का उपयोग करते हैं ।

भारत का पहला कंप्यूटर वायरस कौन सा है?

MS-DOC पर हमला करने वाले पहले वायरस को ब्रेन कहा जाता है और 1986 में लाहौर, पंजाब, पाकिस्तान से दो भाइयों, बासित फारूक अल्वी और अमजद फारूक अल्वी द्वारा लिखा गया था।

दुनिया का सबसे पहला कंप्यूटर वायरस बनाने वाला देश कौन सा है?

पहला कंप्यूटर वायरस बनाने वाले पाकिस्तान के दो भाइ थे जिनका नाम बासित फ़ारुख़ अल्वी और अमजद फ़ारुख़ अल्वी था. जिस वक्त इन दोनो के भाइयों के पास नौकरी नहीं थी उस दौरान उन्होंने कोडिंग सीखना शुरू कर दिया| जिससे उन्हें अच्छे पैसे मिलने लगे थे|


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