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History of Web (वेब का इतिहास)

वेब का इतिहास (History Of Web)


वर्ल्‍ड वाइड वेब के अविष्‍कार से पहले इन्‍टरनेट का प्रयोग बहुत ही कठिन था। इस पर उपलब्‍ध सूचनाओं को खोजना तथा इसको प्रयोग में लाना और कठिन था। इन्‍टरनेट पर उपलब्‍ध फाइलों को ढूँढ़ना तथा उसे डाउनलोड करने के लिए यूनिक्‍स स्किल्स (skills) तथा वि‍शिष्‍ट टूल्‍स की आवश्‍यकता पड़ती थी।

टीम बर्नर्स ली (Tim Berners Lee) को वर्ल्‍ड वाइड वेब का जनक (Father Of World Wide Web) कहा जाता हैं बर्नर्स यूरोपियन आरगेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (European Organization For Nuclear Research ), स्‍वीटजरलैन्‍ड में कार्य कर रहे थे। वह इन्‍टरनेट का प्रयोग करने की जटिल विधि से बिल्‍कुल निराश हो चुके थे तथा हमेशा उन्‍हें आसानी से प्रयोग किये जाने वाले इन्‍टरफेस प्रोग्राम की आवश्‍यकता का एहसास होता था ताकि इन्‍टरनेट पर उपलब्‍ध सूचना को आसानी से एकत्र किया जा सके।

सर्न (CERN) में उनके कार्य के लिए हमेशा इन्‍टरनेट की आवश्‍यकता पड़ती थी। इन्‍टरनेट का उपयोग वह शोध, तथा अपने शोधकर्ता मित्रों के साथ सम्‍पर्क करने में करते थे। उन्‍हें इन्‍टरनेट के उपयोग किये जाने में आने वाली कठिनाइयों ने इस बात के लिए उनके अंदर ऐसे प्रणाली का विकास करने पर प्रेरित किया जो उनके काम को आसान बना सके। 1989 में, उन्‍होंने वर्ल्‍ड वाइड वेब के विकास के लिए सर्न (CERN) के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एण्‍ड कम्‍प्‍यूटिंग फॉर फिजिक्‍स (Electronics and Computing For Physics) विभाग को एक प्रस्‍ताव दिया लेकिन इस प्रस्‍ताव को बहुत अधिक स्‍वीकृति नहीं मिली। फिर जब दोबारा उन्‍होंने अपने मित्र रॉबर्ट कैलियो (Robert Cailliao) के साथ, प्रस्‍ताव की अस्‍वीकृति के कारणों पर विचार करने के बाद जमा किया, तब जाकर वह प्रस्‍ताव मंजूर किया गया और वर्ल्‍ड वाइड वेब के परियोजना का अधिकारिक तौर पर शुरूआत हुई। वेब के लिए उपयुक्‍त धन भी प्रदान किया गया। 1991 में, इसके बारे में इन्‍टरनेट प्रयोगकर्ताओं को सूचना मिली फिर भी शायद ही लोगों ने सोचा होगा कि अब इन्‍टरनेट इतना सरल हो जायेगा।

फरवरी 1993‍ में, नेशनल सेन्‍टर फॉर सुपरकम्‍प्यूटिंग एप्‍लिकेशन्‍स (National Centre for Super Computing Application-NCSA) ने मोजैक (Mosaic) का पहला संस्‍करण विण्‍डो के लिए बाजार में उपलब्‍ध कराया। यह वर्ल्‍ड वाइड वेब के लिए वरदान था जिसने वेब को सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया। इसमें एक यूजर फ्रेन्‍डली ग्राफिकल यूजर इन्‍टरफेस का प्रयोग किया गया था जिसने उस समय के इन्‍टरनेट प्रयोक्‍ता को इन्‍टरनेट के प्रयोग की जटिलता से मुक्‍त कराया। इसके अतिरिक्‍त, मोजैक को माउस के द्वारा भी संचालित किया जा सकता था। अब प्रयोक्‍ता बगैर की – बोर्ड के भी इन्‍टरनेट का आनन्‍द उठा सकते थे जोकि इन्‍टरनेट के क्षेत्र की एक अद्भुत प्रगति थी। वेब अब केवल हायपरटैक्‍स्‍ट नहीं था।


वर्ल्‍ड वाइड वेब के अविष्‍कार के पश्‍चात् प्रयोक्‍ता को इन्‍टरनेट के विभिन्‍न संसाधनों को एक्‍सेस करने के लिए विभिन्‍न टूलों (tools) की आवश्‍यकता नहीं थी तथा वर्ल्‍ड वाइड वेब को हायपरमीडिया (hypermedia) भी कहा जाने लगा क्‍योंकि ये प्रोटोकॉल परस्‍पर संयोजित टैक्‍स्‍ट, वीडियो, ध्‍वनि तथा ग्राफिक्‍स एक साथ सूचना की एक इकाई के रूप में प्रदान करते थे। वेब अब वैश्विक प्रणाली बन गया जिसे दुनियाभर में कही से भी एक्‍सेस किया जा सकता हैं।

मोजैक के आने के बाद तो वेब ने सफलता के आकाश को ही माना छू लिया हो। 1994 में, मोजैक के पहले संस्‍करण के रिलीज (release) के बाद वेब ने नेशनल साइंस फाउन्‍डेशन (National Science Foundation) बैकबोन पर गेफर से ज्‍यादा ट्रैफिक (traffic) बना लिया था।

 

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