Interesting Facts

टच स्क्रीन क्या है और यह कैसे काम करती है?

how touch screen works in hindi

टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी (Touch Screen Technology)

परिभाषा (Definition), कार्य (Working), प्रकार और अनुप्रयोग (Types & Applications)

टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी (Touch screen Technology) डिजिटल दुनिया के अंतर्गत स्क्रीन के अंदर के क्षेत्र में प्रत्यक्ष (direct) कार्य करने की सबसे अच्छा साधन है , अतः हम कह सकते है की टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी संकेतात्मक अर्थात संकेतो पर आधारित तकनीक(gesture-based technology) है | टच स्क्रीन में एक इलेक्ट्रॉनिक दृश्य प्रदर्शन क्षेत्र (electronic visual display) होता  है जो अपने प्रदर्शन क्षेत्र(display area ) पर एक स्पर्श(touch) का पता लगाने में सक्षम है साधारणतः सामान्य अंगुली और हाथ के माध्यम से स्क्रीन पर स्पर्श(touch)किया जाता है जिससे स्क्रीन के अंदर के कार्य सम्पन्न होते है यह तकनीक माउस और कीबोर्ड के अधिकांश कार्यों को करने के लिए कंप्यूटर(computers), ऐसी मशीनों जो उपयोगकर्ता से पारस्परिक संपर्क करने में सक्षम होती है ( user interactive machines), स्मार्ट फोन, टैबलेट आदि में सबसे अधिक व्यापक रूप से(widely) उपयोग की जाती है।

टच स्क्रीन तकनीक पिछले कई वर्षों से उपयोग हो रही है, लेकिन हाल ही में उन्नत टच स्क्रीन तकनीक(advanced touch screen technology) अधिक उपयोग  में आ गई है। कंपनियां इस तकनीक को अपने अधिक से अधिक उत्पादों (more of their products) में शामिल कर रही हैं। तीन सबसे आम टच स्क्रीन प्रौद्योगिकियों(touch screen technologies) में प्रतिरोधक (resistive), कैपेसिटिव (capacitive) और SAW (सतह ध्वनिक लहर(surface acoustic wave)) शामिल हैं। अधिकांश  टच स्क्रीन डिवाइस (low-end touch screen device) में एक मानक सर्किट प्लग-इन बोर्ड (standard printed circuit plug-in board) होता है और इसका उपयोग SPI प्रोटोकॉल पर किया जाता है।

इस प्रणाली(system) के दो भाग हैं, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर।

हार्डवेयर आर्किटेक्चर (hardware architecture) में 8-बिट माइक्रोकंट्रोलर (micro-controller), कई प्रकार के इंटरफ़ेस (interface) और ड्राइवर सर्किट(driver circuits) का उपयोग करते हुए एक स्टैंड-अलोन एम्बेडेड सिस्टम (stand-alone embedded system) होता है। सिस्टम सॉफ़्टवेयर ड्राइवर(system software driver)  इंटरेक्टिव C प्रोग्रामिंग भाषा(interactive C programming language) का उपयोग करके बनाया  गया है।

टच स्क्रीन प्रौद्योगिकी के प्रकार (Types of Touch Screen Technology)

टच स्क्रीन एक 2-आयामी सेंसिंग डिवाइस(2-dimensional sensing device) है अर्थात दो आयामो(X ,Y) के माध्यम से स्पर्श का पता लगाने वाली डिवाइस या उपकरण , जो 2 शीट मटेरियल(2 sheets  material) से बनी है।

चार मुख्य टच स्क्रीन प्रौद्योगिकियां(touch screen technologies) हैं:

  1. प्रतिरोधक(Resistive)
  2. कैपेसिटिव(Capacitive)
  3. सर्फेस अकैसिकल वेव(Surface Acoustical wave (SAW))
  4. इंफ्रारेड (IR)

प्रतिरोधक(Resistive)

प्रतिरोधक टच स्क्रीन (Resistive touch screen) की सबसे ऊपरी परत बेहद लचीली होती है , जो  कि  पॉलीथिन से बनी होती है ,और निचली परत बेहद कठोर होती है जो कांच (glass) की बनी होती है जिनको डॉट्स (insulating dots) के माध्यम से टच स्क्रीन के नियंत्रक (touch screen controller) से जोड़ा जाता है|

प्रतिरोधक टच स्क्रीन पैनल (Resistive touch screen panel) अधिक किफायती(more affordable) होती हैं इस प्रकर की  परत को शक्तिशाली वस्तुओं द्वारा क्षतिग्रस्त(damaged) किया जा सकता है। प्रतिरोधक टच स्क्रीन (Resistive touch screen) को 4-, 5-, 6-, 7-, 8- वायर्ड प्रतिरोधक टच स्क्रीन(wired resistive touch screen) में विभाजित किया गया है। इन सभी का निर्माण डिजाइन समान है लेकिन स्पर्श के निर्देशांक (coordinates of touch) निर्धारित करने के लिए इसकी प्रत्येक विधि में एक प्रमुख अंतर है।

कैपेसिटिव (Capacitive)



कैपेसिटिव (Capacitive) टच स्क्रीन पैनल की सामग्री के साथ लेपित(coated) होता है यह पैनल विद्युत आवेशों(electrical charges) को संग्रहीत(stores) करता है। कैपेसिटिव सिस्टम (Capacitive system) मॉनिटर से 90% तक प्रकाश संचारित(transmit) कर सकता है। सर्फेस-कैपेसिटिव तकनीक(Surface-capacitive technology) में इंसुलेटर (insulator) की केवल एक तरफ ही कंडक्टिंग लेयर(conducting layer) के साथ लेपित होती है। जब भी उंगली से  स्क्रीन को छुआ जाता है, तो बिजली के आवेशों को ले जाने वाला अर्थात संवाहक (conduction of electric charges) अनियोजित परत के ऊपर (conduction of electric charges) होता है, जिसके परिणामस्वरूप गतिशील संधारित्र(dynamic capacitor) का निर्माण होता है। नियंत्रक(controller) तब स्क्रीन के चार कोनों  में होने वाले  परिवर्तनो  को मापकर स्पर्श की स्थिति का पता लगाता है कि कहा स्पर्श किया गया है

अनुमानित कैपेसिटिव तकनीक(projected capacitive technology) में, प्रवाहकीय परत (इंडियम टिन ऑक्साइड) अर्थात जहा से  विधुत प्रवाहित होता है को कई क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर इलेक्ट्रोड के ग्रिड के रूप में बनाया जाता है। इसमें स्पष्ट रूप से आईटीओ(ITO) पैटर्न का उपयोग करके एक्स और वाई अक्ष (x and y axis) दोनों के साथ संवेदन शामिल है। सिस्टम की सटीकता बढ़ाने के लिए, प्रोजेक्टिव स्क्रीन में पंक्ति और स्तंभ (row and column) के प्रत्येक इंटरैक्शन अर्थात प्रत्येक सेल (cell) में एक सेंसर होता है।

इन्फ्रारेड(Infrared):

इन्फ्रारेड टच स्क्रीन तकनीक में, एक्स और वाई अक्ष(X and Y axis) की एक सरणी(array) को आईआर एलईडी (IR LED) और फोटो डिटेक्टरों(photo detectors) के जोड़े के साथ लगाया जाता है। जब भी उपयोगकर्ता (user) स्क्रीन को छूता है, तो फोटो डिटेक्टर प्रकाश द्वारा प्रतिरूपित प्रकाश(light emitted) के पैटर्न में किसी भी छवि का पता लगाता है ।

सतह ध्वनिक लहर(Surface Acoustic wave)

सतह ध्वनिक लहर प्रौद्योगिकी (surface acoustic wave technology) में दो ट्रांसड्यूसर (transducers) होते हैं जिन्हें एक्स और वाई अक्ष (X-axis and Y-axis) के साथ रखा जाता है और कुछ रिफ्लेक्टर के साथ मॉनिटर की ग्लास प्लेट होती है। जब स्क्रीन को छुआ जाता है, तो तरंगों को अवशोषित (waves are absorbed) किया जाता है और उस बिंदु पर एक स्पर्श (touch) का पता लगाया जाता है। ये परावर्तक एक ट्रांसड्यूसर (transducers) से दूसरे ट्रांसड्यूसर (transducers) में भेजे गए सभी विद्युत संकेतों को दर्शाते हैं। यह प्रौद्योगिकी गुणवत्ता (quality) के माध्यम से उत्कृष्टता प्रदान करती है।

टच स्क्रीन के घटक (Components of touch screen)

एक बुनियादी (basic) टच स्क्रीन में तीन मुख्य घटकों के रूप में एक टच सेंसर(touch sensor), एक नियंत्रक (controller) और एक सॉफ्टवेयर ड्राइवर(software driver) होता है। टच स्क्रीन को टच स्क्रीन सिस्टम (touch screen system) बनाने के लिए डिस्प्ले और पीसी(display and a PC) को साथ  में जोड़ा जाना आवश्यक है।

  1. टच सेंसर(touch sensor): सेंसर में आम तौर पर विद्युत प्रवाह अर्थात बिजली का प्रवाह  होता है जो sensor के माध्यम से  प्रवाहित हो रहा होता  है इसी के साथ  सेंसर के माध्यम से एक संकेत (signal) भी प्रवाहित होता है जव भी स्क्रीन को छुआ जाता है तो इस संकेत(signal) में परिवर्तन होता है इस परिवर्तन का उपयोग स्क्रीन के स्पर्श (touch) के स्थान को निर्धारित करने के लिए किया जाता है |
  2. नियंत्रक(Controller): एक नियंत्रक(Controller) टच सेंसर(touch sensor) और पीसी(PC)  अर्थात कंप्यूटर के बीच जुड़ा होता है। नियंत्रक(Controller)सेंसर से जानकारी लेता है और पीसी की समझ के लिए इसका अनुवाद(translation) करता है।नियंत्रक(Controller)निर्धारित करता है कि किस प्रकार के कनेक्शन की आवश्यकता है।
  3. सॉफ्टवेयर ड्राइवर(Software driver): यह कंप्यूटर और टच स्क्रीन को एक साथ काम करने की अनुमति(permission) देता है। यह ओएस(OS) को बताता है कि नियंत्रक(Controller) से भेजे गए टच इवेंट(touch event) की जानकारी से कैसे इंटरैक्ट (interact) अर्थात कैसे उसको पढ़ा, समझा और उस पर कार्य किया जाय जाए।

अनुप्रयोग (Application)

  • टच स्क्रीन का प्रयोग रिमोट कण्ट्रोल द्वारा किया जाता है|
  • केवल टच स्क्रीन को छूने और एक ग्राफिकल इंटरफ़ेस(graphical interface) के साथ ही वास्तविक समय में(In real time), कठिन से कठिन कार्यो की निगरानी, नियंत्रण और उन्हें किया जा सकता है|
  • एक ओर ट्रांसमिशन के अंत में (at the transmission end), टच स्क्रीन कंट्रोल यूनिट का उपयोग कर रोबोट को  विशिष्ट दिशाओं जैसे  आगे, पीछे, बाईं ओर और दाईं ओर घूमाया जा  सकता है । और दूसरे अंत में (at the receiving end) चार मोटर्स माइक्रोकंट्रोलर एक साथ साथ टकराते (interfaced)  हैं। उनमें से दो का उपयोग रोबोट के आर्म और ग्रिप मूवमेंट(Arm and grip movement of the robot) के लिए किया जाता है और अन्य दो का उपयोग बॉडी मूवमेंट(body movement) के लिए किया जाता है।
  • कॉल के जवाब देने, कर्मचारियों के साथ संपर्क करने ,वाहनों और रोबोटों के संचालन (operating) के लिए वायरलेस संचार का उपयोग करके टच स्क्रीन तकनीक का उपयोग किया जाता हैं। इसप्रकार के कार्यो के लिए, आरएफ संचार या अवरक्त संचार (RF communication or infrared communication) का उपयोग किया जाता है।

सिलेबस के अनुसार नोट्स
DCA, PGDCA, O Level, ADCA, RSCIT, Data Entry Operator
यहाँ क्लिक करें


Rs. 50 जीतने का मौका
सब्सक्राइब करें और जीतें
यहाँ क्लिक करें