Internet and web page designing

URL (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर) से आप क्या समझते है ?

URL (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर) :-  


URL का फुल फॉर्म Uniform Resource Locator होता है जो किसी website या वेबसाइट के पेज को रिप्रेजेंट करता है, या आपको किसी वेब पेज तक ले जाता है। यूआरएल इन्टरनेट में किसी भी फाइल या वेब साईट का एड्रेस होता है | URL की शुरुआत Tim Berners Lee ने 1994 में की थी |

URL के तीन हिस्से होते है :-

  1. HTTP:- पहला भाग http यानि hypertext transfer protocol होता है जिसकी मदद से इटरनेट पर डाटा Transfer  होता है|
  2. Domain Name:- दूसरा भाग होता है domain name जो कि किसी particular वेबसाइट का पता (address) होता है|
  3. WWW:- यह एक सर्विस है |
  4. Yahoo:- यह संस्था का नाम है |
  5. .com :- यह डोमेन एक्सटेंशन होता है, जो यह दर्शाता है की वेबसाइट किस प्रकार की है |

सामान्यत: निम्न 6 प्रकार के डोमेन यूज किये जाते है |

.Com – Commercial Website (व्यापारिक संस्थान के लिए)


.Edu – Education Website (शैक्षणिक संस्थान के लिए)

.Gov – Government Website (शासकीय संस्थान के लिए)

.Mil – Millitry Website (मिलिट्री संस्थान के लिए)

.Org – Organisation Website (संगठन संस्थान के लिए)

URL कैसे काम करता है ?

इन्टरनेट पर हर वेबसाइट का एक IP Address होता है जो  numerical होता है जैसे www.google.com का IP एड्रेस  64.233.167.99 हैं तो जैसे ही हम अपने ब्राउज़र में  किसी वेबसाइट का URL टाइप करते हैं तब हमारा browser उस url को DNS की मदद से उस डोमेन के IP address में बदल देता है। और उस वेबसाइट तक पहुच जाता है जो हमने सर्च की थी । शुरुवात में direct IP से ही किसी वेबसाइट को एक्सेस किया जाता था लेकिन यह एक बहुत कठिन तरीका था । क्योंकि इतने लम्बे  नबर को तो कोई याद रख पाना बहुत मुश्किल था । इसलिये बाद में DNS (domain name system) नाम बनाये गए जिस से हम किसी वेबसाइट का नाम आसानी से याद रखा जा सकता है


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