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जानें वेब कैसे काम करता है?

जानें वेब कैसे काम करता है? (How does Web Works?)

जब आप किसी वेब ब्राउजर में किसी वेबसाइट को सर्च करते है, या वेब साईट को खोलने के लिए उस वेबसाइट का यूआरएल टाइप करते हैं जैसे www.google.com को ओपन करते है, इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट करते हैं, अपने ईमेल में आये हुए मेल को चेक करते हैं आदि यह सब हमे देखने में बहुत ही आसान लगता है क्योकि जैसे ही आप इन्टरनेट पर किसी जानकारी को सर्च करते है और वह जानकारी आपको तुरंत डिस्प्ले हो जाती है लेकिन यह सब वास्तव में कैसे होता है? तो आज इस पोस्ट में हम यही जानेंगें की जब आप किसी वेबसाइट को सर्च करते है तो वेब किस तरह काम करता है?

जैसे ही यूजर अपने ब्राउज़र में वेबसाइट का एड्रेस (URL) इंटर करता हैं तो निम्न प्रक्रिया होती है-

  1. ब्राउज़र DNS (Domain Name System) सर्वर के लिए एक Request भेजता है।
  2. DNS डोमेन नेम को IP एड्रेस में ट्रांसलेट करता है।
  3. इसके बाद गूगल सर्वर को Request भेजने के लिए आपके ब्राउज़र के IP एड्रेस का उपयोग करता है।
  4. फिर आपका ब्राउज़र प्राप्त फ़ाइलों को लोड करता है।

अब हम यह जानेंगे कि यह प्रोसेस कैसे काम करती है हम नीचे प्रत्येक चरण पर विस्तार से चर्चा करेंगे:

Step:1 Request sent to the DNS

  • सबसे पहले हम यह जानते है की URL क्या है? URL का फुल फॉर्म Uniform Resource Locator होता है जो किसी Website या Webpage को रिप्रेजेंट करता है, या आपको किसी वेब पेज तक ले जाता है। यूआरएल इन्टरनेट में किसी भी फाइल या वेब साईट का एड्रेस होता है | URL की शुरुआत Tim Berners Lee ने 1994 में की थी |
  • http: // (Hypertext transfer protocol): यह URL का पहला भाग होता है जो यह बताता है कि ब्राउज़र किस प्रोटोकॉल का उपयोग करेगा। साधारण शब्दों में प्रोटोकॉल नियमों का एक समूह होता है जो ब्राउज़र और सर्वर को एक दूसरे के साथ कम्युनिकेशन करने की अनुमति देता हैं|
  • google.com को डोमेन नेम कहा जाता है जो वास्तव में इंगित करता है कि हम किन सर्वरों से कांटेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

अब उपरोक्त URL को सबसे पहले आपके ISP को भेजा जाता है, जो आपका Internet Service provider है। Internet Service provider वह होते है जो आपको इंटरनेट की सुविधा प्रदान करते है| इसके बाद ISP, DNS सर्वर के लिए Request भेजता है।

अब हम यह जानेंगे कि DNS के लिए Request भेजने की आवश्यकता क्यों है?

जब आप Google.com इंटर करते हैं, तो यह रिक्वेस्ट इंटरनेट पर कई विशेष कंप्यूटरों में से एक पर जाती है जिसे डोमेन नेम सर्वर (DNS) के रूप में जाना जाता है। इन सभी रिक्वेस्ट को विभिन्न राउटर और स्विच के माध्यम से रूट किया जाता है। डोमेन नेम सर्वर मशीन के नामों और उनके आईपी एड्रेस को स्टोर करके रखते हैं, इसलिए जब आप Google.com में कुछ भी टाइप करते हैं तो यह उस URL को एक नंबर में परिवर्तित कर देता है जिसे IP address कहा जाता है, यह उन कंप्यूटरों की पहचान करता है जो आपके लिए Google वेबसाइट की सेवा देते हैं।

इसे हम एक उदाहरण से समझते है जैसे यदि आप अपने किसी दोस्त को बुलाना चाहते हैं। तो आप अपने फोन की कांटेक्ट लिस्ट में उसका नाम सर्च करते है और उसे कॉल करने के लिए उसके नाम पर क्लिक करते हैं। लेकिन जब आप अपने दोस्त को कॉल करने के लिए उसके नाम पर क्लिक करते हैं तो वास्तव में उस नाम के पीछे उसका नंबर होता है जो कि उसके साथ कम्युनिकेशन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है|

उसी तरह, जब हम अपने कंप्यूटर के माध्यम से सर्वर से कम्यूनिकेट करना चाहते हैं, जिसे वास्तव में एक आईपी एड्रेस की आवश्यकता होती है। नेटवर्क में विशेष डिवाइस पर डेटा भेजने के लिए नेटवर्क से कनेक्‍ट प्रत्येक डिवाइस जैसे, कंप्यूटर, सर्वर, प्रिंटर, स्मार्टफ़ोन का एक यूनिक एड्रेस होता है इसी यूनिक एड्रेस को IP address कहते है, और कम्युनिकेशन के लिए ये डिवाइस इंटरनेट प्रोटोकॉल का उपयोग करते हैं। IP एड्रेस 172.168.150.4 जैसा दिखता है।

Step:2 DNS translates the URL to IP address. (DNS URL को आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट करता है।)

अब हम जानते हैं कि हमें DNS की आवश्यकता क्यों पड़ती है लेकिन पहले हम यह जान लेते है कि DNS क्या है?

DNS (Domain Name System) जिसे इंटरनेट की फोनबुक के रूप में भी जाना जाता है। Domain Name जैसे google.com के माध्यम से यूजर ऑनलाइन जानकारी प्राप्त करते हैं। वेब ब्राउज़र Internet Protocol (IP) एड्रेस के माध्यम से बातचीत करते हैं। DNS, Domain Names को आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट करता है ताकि ब्राउज़र इंटरनेट रिसोर्सेस को लोड कर सकें। इंटरनेट से जुड़े प्रत्येक डिवाइस में एक यूनिक आईपी एड्रेस होता है जो अन्य मशीनें डिवाइस को खोजने के लिए उपयोग करती हैं। domain name system (DNS) यूआरएल को उनके आईपी एड्रेस से जोड़ती है। DNS के साथ, ब्राउज़र में संख्याओं के बजाय शब्दों को टाइप करना संभव है, जिससे लोग वेबसाइटों को खोज सकते हैं

Step:3 Your browser uses the IP address to send a request to Google servers.
(आपका ब्राउज़र गूगल
सर्वर को Request भेजने के लिए आईपी एड्रेस का उपयोग करता है।)

जैसे ही हमारे ब्राउज़र को गूगल सर्वर का आईपी एड्रेस प्राप्त होता है अब हम आसानी से अपनी वेबसाइट से संपर्क कर सकते हैं। अब आपका ब्राउज़र आईपी एड्रेस का उपयोग करके गूगल सर्वर को एक Request भेजता है|

Step:4  Your browser loads the received files (आपका ब्राउज़र प्राप्त फ़ाइलों को लोड करता है)

सर्वर के पास अपना एक विशेष सॉफ़्टवेयर होता है, जो उन्हें यह बताता है कि क्लाइंट (ब्राउज़र) से Request प्राप्त होने पर कैसे जबाब दें? इस प्रकार अंत में ब्राउज़र 3 अलग-अलग फ़ाइलों को प्राप्त करता हैं HTML, CSS, JavaScript

  1. HTML की फ़ाइल उस वेबसाइट के स्ट्रक्चर को परिभाषित करती है जो ब्राउज़र को यह बताती है कि पेज का कौन सा भाग heading, footer, image आदि है। इसमें कोई भी स्टाइल फ़ाइल में शामिल नहीं रहती है।
  2. CSS फ़ाइल वेबसाइट को स्टाइलिस्ट बनाती है। CSS के कारण ही आप वेब पर कई रंगीन वेबसाइटों को देख पाते हैं।
  3. आखिरी में जावास्क्रिप्ट आती है जो वेबसाइट को Dynamic और Interactive बनाता है जावास्क्रिप्ट प्रोग्रामिंग भाषा डेवलपर्स का उपयोग करता है जो यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करता है और उनके द्वारा किये गए कार्य का आउटपुट देता है| उदाहरण के लिए, जब आप किसी भी वेबसाइट को लॉगआउट करते हैं, तो ज्यादातर confirmation Window यह पूछती है कि क्या आप वास्तव में लॉग आउट करना चाहते हैं या नहीं।
सरल शब्दों में सारांश
  • यूजर ब्राउज़र में किसी भी वेबसाइट का URL इंटर करता है उदाहरण के लिए, Google.com। यह रिक्वेस्ट DNS (Domain Name Server) को भेजी जाती है।
  • इसके बाद Domain Name Server वेबसाइट को होस्ट करने वाले सर्वर के लिए एक IP address देता है| (उदाहरण के लिए, 68.178.157.132)।
  • ब्राउज़र DNS द्वारा दिए गए IP Address का उपयोग करके वेब सर्वर से पेज के लिए रिक्वेस्ट करता है।
  • वेब सर्वर पेज की रिक्वेस्ट करने वाले ब्राउज़र द्वारा दिए गए IP address पर पेज Display करता है।
  • ब्राउज़र वेब पेज के रूप में आपके कंप्यूटर पर सभी जानकारी को डिस्प्ले करता है।

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