Internet and web page designing

Types of E-Mail (ई-मेल के प्रकार)

Types of E-Mail (ई-मेल के प्रकार)

ई-मेल सेवा दो प्रकार की होती हैं- पॉप-आधारित (POP-based) तथा वेब-आधारित (Web-based)


पॉप-आधारित ई-मेल (POP-based E-Mail)

पॉप (POP) का पूरा नाम पोस्‍ट ऑफिस प्रोटोकॉल (Post Office Protocol) हैं। यह एक ऐसा प्रोटोकॉल हैं,  जो वेब सर्वरों द्वारा अपनाया जाता हैं। जब आप किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता कम्‍पनी से इंटरनेट कनेक्‍शन लेते हैं। तो लॉगइन यूजरनेम और पासवर्ड के साथ ही आपको एक ई-मेल खाता भी दिया जाता हैं। यह खाता एक प्रकार का मेल-बॉक्‍स हैं, जिसमें आपके नाम आयी हुई सभी ई-मेलों को रखा जाता हैं। इस मेल खाते से आप ई-मेल भेज भी सकते हैं। ई-मेल खाते को खोलने के लिए भी आपको एक पासवर्ड दिया जाता हैं आप इसका उपयोग करके उसे खोल सकते हैं और अपने नाम आयी हुई ई-मेलों को इंटरनेट सेवा प्रदाता कम्‍पनी के सर्वर से अपने कम्‍प्‍यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं। बाद में आप कभी भी उस ई-मेल को पढ़ सकते हैं। डाउनलोड़ की हुई ई-मेल को पढ़ने के लिए कम्‍प्‍यूटर को इंटरनेट से जोड़े रखना आवश्‍यक नहीं होता, बल्कि उसे ऑफ-लाइन भी पढ़ा जा सकता हैं।

पॉप-आधारित ई-मेल के लाभ – 

  • पॉप-आधारित ई-मेल खाते से हमें सबसे बड़ा लाभ यह हैं कि हम ऑफ-लाइन रहकर अपनी ई-मेल तैयार कर सकते हैं और फिर इंटरनेट कनेक्‍शन जोड़कर एक साथ उन सबको भेज सकते हैं।
  • इससे इंटरनेट से जुड़े रहने का खर्च न्‍यूनतम हो जाता हैं।
  • ऑफ लाइन ई-मेल तैयार करते समय हम अपने कम्‍प्‍यूटर में उपलब्‍ध स्‍पेलिंग चेकर प्रोग्राम का भी उपयोग कर सकते हैं और भेजने से पहले स्‍पेलिंग की गलतियों को ठीक कर सकते हैं।
  • हम अपने नाम आयी हुई ई-मेल को डाउनलोड करके उसे भी ऑफ-लाइन पढ़ सकते हैं तथा इस प्रकार इंटरनेट से जुड़ने का खर्च कम कर सकते हैं।
  •  इसमें आप बड़े आकार की फाइलों को भी अन्‍य लोगों को ई-मेल के साथ अटैचमेंट के रूप में भेज सकते हैं।

पॉप-आधारित ई-मेल की कमियाँ – 

इस तरह के ई-मेल खाते में इस बड़ी कमी यह हैं कि उस खाते को केवल उन कम्‍प्‍यूटरों पर ही खोला जा सकता हैं। जो उस इंटरनेट सेवा प्रदाता के उसी सर्वर से जुड़े हुए हैं। इसका अर्थ है‍ कि सामान्‍यतया आप दूसरो देशों या राज्‍यों या शहरों में अपने ई-मेल खाते को नहीं खोल सकेंगे।

वेब-आधारित ई-मेल (Web-based E-Mail)

यह एक ऐसी ई-मेल सेवा हैं, जो कुछ व्‍यावसायिक वेबसाइटें अपनी वेबसाइट पर उपयोगकर्ताओं को प्राय: नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराती हैं। इसके लिए आपको पहले उस वेबसाइट को खोलकर उसमें अपना ई-मेल खाता बनाना पड़ता हैं। इसके लिए कुछ जानकारियाँ देते हुए एक फार्म भरना होता हैं। तब वह वेबसाइट आपको एक लॉगिन नेम (Login Name) और पासवर्ड (Password) देती हैं, जिनका उपयोग करके आप अपने ई-मेल खाते को खोल सकते हैं और वहॉ से ई-मेल भेज सकते हैं तथा प्राप्‍त भी कर सकते हैं।

वेब-आधारित ई-मेल के लाभ 

वेब-आधारित ई-मेल बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि आप अपने ई-मेल एकाउंट को कभी भी और कहीं भी खोल सकते हैं। इसके लिए पहले आपको उस वेबसाइट को खोलना होता हैं, जिसमें लॉंगिन करके अपने ई-मेल खाते का उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार का ई-मेल खाता प्राय: नि:शुल्‍क होता हैं, इसलिए कोई अतिरिक्‍त खर्च नहीं करना पड़ता।


वेब-आधारित ई-मेल की कमियाँ

वेब-आधारित ई-मेल खातों में सबसे बड़ी कमी यह हैं कि आप इसमें ऑफ-लाइन कार्य नहीं कर सकते हैं, आपको कोई ई-मेल तैयार करने और पढ़ने के लिए लगातार इंटरनेट से जुड़े रहना और उस वेबसाइट को भी खोले रखना आवश्‍यक होता हैं, जिसमें आपका ई-मेल खाता बना हुआ हैं। इस तरह के खातों में एक कमी यह भी हैं कि इनमें अटैचमेंट के रूप में भेजी जाने वाली फाइलों के आकार और, संख्‍या पर एक सीमा का प्रतिबंध होता हैं।

Latest update on Whatsapp




Download our Android App

Computer Hindi Notes Android App